गाे अधिकार हुंकार रैली में 50 हजार गाे सेवकों ने भरी हुंकार

 


जयपुर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। प्रदेश की गौशालाओं को नियमित अनुदान देने, ऑडिट रिकवरी के नाम पर निकाली गई करीब 100 करोड़ रुपये की राशि की समीक्षा करने और गोवंश के लिए पर्याप्त पानी, चारा व चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर शुक्रवार को सांगानेर स्थित श्री पिंजरापोल गौशाला में ‘गाे अधिकार हुंकार रैली एवं महासम्मेलन’ आयोजित किया गया। राजस्थान गोसेवा समिति के बैनर तले हुए आयोजन में प्रदेशभर की करीब 4,300 गौशालाओं के 50 हजार से अधिक गोसेवक और करीब 700 संत-महात्मा शामिल हुए। सम्मेलन में गोवंश संरक्षण से जुड़ी समस्याएं उठाई गईं। वहीं, राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने गौशालाओं की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष पैकेज और कमेटी बनाने सहित कई कदमों की जानकारी दी।

अखिल भारतीय गोसेवा सहयोग परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक अतुल गुप्ता के अनुसार, सम्मेलन में राज्य सरकार की ओर से मंत्री के.के. बिश्नोई और जोगाराम कुमावत पहुंचे। उन्होंने बताया कि सरकार ने गाेशालाओं के लिए तीन महीने के विशेष पैकेज के तहत 400 करोड़ रुपये दिए हैं। अप्रैल से जुलाई तक चार महीने का अनुदान अग्रिम देने और गौशालाओं से बकाया राशि की रिकवरी नहीं करने की बात भी कही गई। इसके अलावा गौशालाओं की समस्याओं और मांगों के समाधान के लिए कमेटी बनाई जाएगी, जो तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

राजस्थान गोसेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष महंत गोविन्दराम शास्त्री ने कहा कि गोसेवा को लेकर सरकार की सोच सकारात्मक है, लेकिन योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन जरूरी है। प्रदेश की हजारों गाेशालाएं निराश्रित गोवंश की देखभाल कर रही हैं। अनुदान मिलने में देरी और संसाधनों की कमी से उनके संचालन में परेशानी आती है। उन्होंने अनुदान जारी करने के लिए निश्चित कैलेंडर बनाने और व्यवस्था को पारदर्शी करने की मांग की।

समिति के प्रदेश महामंत्री सीए बीपी क्याल ने कहा कि अनुदान में देरी का सीधा असर गौशालाओं में चारे, पानी, पशु चिकित्सा और रोजमर्रा के संचालन पर पड़ता है। उन्होंने ऑडिट रिकवरी के नाम पर निकाली गई करीब 100 करोड़ रुपये की राशि की समीक्षा वास्तविक परिस्थितियों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर करने की मांग रखी।

समिति के मुख्य सलाहकार रघुनाथ सिंह शिवलाव ने बताया कि पिछले डेढ़ साल से गाेशालाओं के संचालन में परेशानियां बढ़ी हैं। उन्होंने रिकवरी के मामलों की समीक्षा कर संचालकों को राहत देने की मांग की।

द्वारका पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने गोमाता को राष्ट्रीय माता घोषित करने और उन्हें पशु की श्रेणी से ऊपर दर्जा देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि जिस तरह बाघ राष्ट्रीय पशु और मोर राष्ट्रीय पक्षी है, उसी तरह गोमाता को भी राष्ट्रीय माता का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान में गोवंश संरक्षण के लिए गोपालन मंत्रालय बनाया गया है, लेकिन गोपालकों, गोभक्तों और गौशाला संचालकों की समस्याओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।

मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास महाराज ने भी गोसेवा को भारतीय संस्कृति और करुणा से जुड़ा विषय बताते हुए गोवंश की रक्षा तथा गौशालाओं में चारा, पानी और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने को शासन और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताया।

सम्मेलन में प्रदेश में सूखे जैसी परिस्थितियों को देखते हुए गौशालाओं में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने और पशु शिविर शुरू करने की मांग भी उठी। समिति ने उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ के निर्देशों का हवाला देते हुए पाइपलाइन, ट्यूबवेल या टैंकर के माध्यम से पानी की व्यवस्था करने पर जोर दिया। इसके साथ ही जरूरत के अनुसार गौशालाओं को भूमि आवंटित करने और लंबे समय से लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण करने की मांग की गई।

शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने कहा कि हरे चारे के अलावा भूसा, दाना और खली जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं। सरकार चाहे तो नजदीकी राज्यों से चारे की व्यवस्था कर सकती है। उन्होंने कहा कि गोमाता अपनी जरूरतें खुद नहीं बता सकतीं, इसलिए उनकी देखभाल करने वालों की जिम्मेदारी है कि उन्हें पर्याप्त भोजन और सुविधाएं मिलें।

ब्रज मंडल के मेवात क्षेत्र से आए गोपेश कृष्णदास ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय का धार्मिक और सामाजिक महत्व है। गोशाला संचालक गोवंश की सेवा, सुरक्षा और सम्मान के लिए काम कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें अनुदान के लिए इंतजार करना पड़ना चिंता का विषय है। उन्होंने चेतावनी दी कि गौशालाओं को समय पर और पर्याप्त अनुदान नहीं मिला तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश