पंचक में होगा गणेश विसर्जन, अनंत चतुर्दशी पर बप्पा को दी जाएगी विदाई

 


जयपुर, 24 सितंबर (हि.स.)। अनंत चतुर्दशी पर शुक्रवार को गणेशोत्सव का समापन होगा। घरों और सार्वजनिक पंडालों में विराजमान गणपति की विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद विसर्जन किया जाएगा। जयपुर पंचांग के अनुसार 25 सितंबर को चतुर्दशी तिथि रात 11.07 बजे तक रहेगी। इस दिन पंचक और शूल योग का संयोग भी रहेगा।

पंडित बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि चंद्रमा के धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में गोचर की पांच दिन की अवधि को पंचक कहा जाता है। पंचांग के अनुसार इस बार पंचक 23 सितंबर की रात से 28 सितंबर की सुबह तक रहेगा। ऐसे में 25 सितंबर को गणेश विसर्जन पंचक काल में होगा।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान कुछ कार्यों को लेकर सावधानी बरतने की परंपरा है। हालांकि धार्मिक विद्वानों के अनुसार गणेश विसर्जन जैसे निर्धारित धार्मिक अनुष्ठान पर पंचक के सामान्य नियम उसी प्रकार लागू नहीं होते। अनंत चतुर्दशी पर गणेश प्रतिमा के विसर्जन की परंपरा के अनुसार श्रद्धालु पूजा-अर्चना के बाद बप्पा को विदाई देंगे।

विसर्जन से पहले भगवान गणेश की पूजा और आरती की जाएगी। उन्हें फूल, दूर्वा, फल, मोदक और परंपरा के अनुसार नैवेद्य अर्पित कर सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना की जाएगी। इसके बाद श्रद्धालु गणपति प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाएंगे।

जयपुर पंचांग के अनुसार गणेश विसर्जन के लिए सुबह चरा, लाभ और अमृत चौघड़िया करीब 6.17 से 10.48 बजे तक रहेगा। इसके बाद शुभ चौघड़िया दोपहर 12.18 से 1.49 बजे तक रहेगा। शाम को चरा चौघड़िया 4.50 से 6.20 बजे तक रहेगा। स्थानीय गणना के आधार पर अलग-अलग पंचांगों में समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

पंचांग के अनुसार 25 सितंबर को शूल योग भी रहेगा, जो दोपहर करीब 2.50 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे शुभ नहीं माना जाता है। हालांकि अनंत चतुर्दशी के निर्धारित धार्मिक अनुष्ठान के तहत श्रद्धालु पूजा-अर्चना के बाद परंपरानुसार गणपति का विसर्जन करेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश