बप्पा की अगवानी में जयपुर के बाजारों में गणेश प्रतिमाओं की बहार
जयपुर, 12 सितंबर (हि.स.)। गणेश चतुर्थी की आहट के साथ ही गुलाबी नगरी के बाजारों की रंगत बदलने लगी है। प्रमुख बाजारों और सड़कों के किनारे भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रही हैं। कहीं मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं तो कहीं लोग अपनी पसंद के बप्पा की प्रतिमा तलाशते नजर आ रहे हैं। गणेश चतुर्थी 14 सितंबर (सोमवार) को मनाई जाएगी। पर्व को लेकर घरों से लेकर गणेश उत्सव समितियों के पंडालों तक तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं।
शहर में जगह-जगह भगवान गणेश की छोटी से लेकर बड़ी प्रतिमाएं सजाई गई हैं। मूर्तिकारों ने अलग-अलग आकार, स्वरूप और शृंगार में प्रतिमाएं तैयार की हैं। पारंपरिक पगड़ी और मुकुट से सजे बप्पा के साथ आकर्षक पोशाक और बहुरंगी शृंगार वाली प्रतिमाएं भी लोगों का ध्यान खींच रही हैं। सौम्य मुस्कान, आशीर्वाद मुद्रा और राजसी स्वरूप में तैयार गणेश प्रतिमाओं की विशेष मांग है। प्रतिमाओं पर की गई बारीक कलाकारी और आकर्षक रंगों का संयोजन इन्हें और मनमोहक बना रहा है।
गणेश उत्सव का उत्साह घरों तक ही सीमित नहीं है। शहर की विभिन्न गणेश उत्सव समितियां भी पंडालों में बप्पा की स्थापना की तैयारियों में जुटी हैं। समितियों की ओर से बड़ी और आकर्षक प्रतिमाओं का चयन किया जा रहा है। वहीं घरों में गणेश स्थापना करने वाले श्रद्धालु अपनी सुविधा और स्थान के अनुसार छोटी व मध्यम आकार की प्रतिमाएं खरीद रहे हैं। कई श्रद्धालु परिवार की परंपरा और अपनी पसंद के अनुसार विशेष स्वरूप वाली गणेश प्रतिमा तलाश रहे हैं।
गणेश चतुर्थी को लेकर उत्साह का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई मूर्तिकारों के पास मनपसंद प्रतिमाओं की अग्रिम बुकिंग पहले ही हो चुकी है। श्रद्धालु अपनी पसंद के आकार, स्वरूप और शृंगार के अनुसार प्रतिमाएं तैयार करवा रहे हैं। गणेश उत्सव समितियों ने भी पंडालों के लिए बड़ी प्रतिमाओं की बुकिंग कराई है। पर्व नजदीक आने के साथ बाजारों में खरीदारी की रफ्तार और बढ़ने की उम्मीद है।
इस बार गणेश प्रतिमाओं में पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी नजर आ रहा है। कारीगर कमलेश ने ऐसी गणेश प्रतिमा तैयार की है, जो पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल है। इसके निर्माण में पीओपी का इस्तेमाल नहीं किया गया है, बल्कि केवल मिट्टी का उपयोग किया गया है। प्रतिमा की खासियत यह है कि इसमें बीज भी डाले गए हैं।
कारीगर कमलेश के अनुसार गणेश प्रतिमा के विसर्जन के बाद जब मिट्टी पानी और जमीन में मिल जाएगी, तो प्रतिमा में मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप लेंगे। यानी बप्पा की विदाई के बाद भी प्रकृति को नया जीवन देने का संदेश जारी रहेगा। प्रतिमा तैयार करते समय पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा गया है।
बीज वाली मिट्टी की प्रतिमा गणेश स्थापना और विसर्जन की परंपरा को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ती है। श्रद्धालु पर्व के बाद प्रतिमा का विसर्जन करते हैं और मिट्टी के साथ उसमें मौजूद बीज भी प्रकृति का हिस्सा बन जाते हैं। इससे विसर्जन के बाद पौधों के रूप में हरियाली का संदेश देने की अवधारणा जुड़ी है।
गणेश चतुर्थी के दौरान जहां बाजारों में आकर्षक और कलात्मक प्रतिमाओं की मांग बढ़ रही है, वहीं पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाएं भी श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रही हैं। मिट्टी और बीज से तैयार यह प्रतिमा 'विसर्जन के बाद भी बप्पा की मौजूदगी' का भाव दे रही है। ऐसे में बप्पा के स्वागत के साथ ही जयपुर में इस बार पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी बाजारों से घरों और पंडालों तक पहुंच रहा है। शहर में जगह-जगह 'गणपति बप्पा मोरया' की गूंज के बीच श्रद्धालु अपने आराध्य के स्वागत की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश