फ्रांसीसी कंपनी को जमीन आवंटन में देरी पर सियासत तेज, कांग्रेस ने सरकार को घेरा
जयपुर, 27 मार्च (हि.स.)। राजस्थान में निवेश को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। फ्रांस की कंपनी सॉफलेट माल्ट इंडिया को जमीन आवंटन में देरी और आ रही परेशानियों को लेकर फ्रांस के राजदूत की चिट्ठी सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
रीको की ओर से जमीन आवंटन में देरी और उच्च दरों को लेकर राजदूत ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर कंपनी की समस्याओं के समाधान और बैठक के लिए समय देने का आग्रह किया है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पत्र साझा करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्तर पर बातचीत के बाद भी निवेश धरातल पर नहीं उतर रहा, तो यह सिस्टम की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि निवेशकों को जानबूझकर उलझाकर “सेटिंग” के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कौन फाइलें रोककर बैठा है और किसके इशारे पर निवेश अटकाया जा रहा है। उन्होंने ‘राइजिंग राजस्थान’ अभियान पर भी तंज कसते हुए इसे “राइजिंग कमीशन” करार दिया।
वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यह मामला साबित करता है कि राज्य सरकार निवेशकों को आकर्षित करने के बजाय उन्हें हतोत्साहित कर रही है। जूली ने कहा कि जिन निवेश प्रस्तावों पर सहमति बन चुकी है, उनके बावजूद निवेशकों को जमीन के लिए भटकना पड़ रहा है। उन्होंने इसे प्रदेश की छवि के लिए नुकसानदायक बताते हुए ‘राइजिंग राजस्थान’ अभियान को “जोक ऑफ राजस्थान” तक कह दिया।
इस पूरे मामले पर अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, इस घटनाक्रम ने प्रदेश में निवेश माहौल और औद्योगिक नीतियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे मामलों का समय पर समाधान नहीं हुआ, तो इससे राज्य में निवेश की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित