12 साल की उम्र में हुआ बाल विवाह, नौ वर्ष बाद मिली मुक्ति
जोधपुर, 19 मार्च (हि.स.)। महज 12 साल की उम्र में बाल विवाह की बेडियों में जकड़ कर 9 साल तक दंश झेलने के बाद आखिरकार 21 वर्षीय बालिका वधु खुशबू को नवसंवत्सर के मौके पर बाल विवाह से मुक्ति की सौगात मिल गई।
सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी एवं पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डॉ. कृति भारती की मदद से खुशबू का बाल विवाह निरस्त हो गया। जोधपुर के पारिवारिक न्यायालय संख्या-2 के न्यायाधीश वरुण तलवार ने बाल विवाह के खिलाफ सख्त संदेश देते हुए खुशबू के बाल विवाह निरस्त का फैसला सुनाया। कोर्ट के फैसले के बाद खुशबू और उसके परिवार की आंखों से राहत और खुशी के आंसू छलक पड़े। वर्तमान में करीब 21 वर्षीय खुशबू का बाल विवाह समाज के दबाव में वर्ष 2016 में जोधपुर जिले के एक ग्रामीण इलाके में कर दिया गया था। उस समय उसकी उम्र करीब 12 साल थी। इसके कुछ सालों बाद में ही ससुराल वालों ने गौना करवाने का दबाव बनाया तो खुशबू अवसादग्रस्त हो गई।
इस बीच में खुशबू को सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी और चाइल्ड एंड वूमेन राइट्स एडवोकेट डॉ. कृति भारती की बाल विवाह निरस्तीकरण मुहिम की जानकारी मिली। डॉ. कृति ने उसे कानूनी मदद और मानसिक संबल दिया। करीब डेढ़ साल पहले डॉ.कृति की मदद से खुशबू ने पारिवारिक न्यायालय संख्या-2 में बाल विवाह निरस्तीकरण के लिए वाद दायर किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद पारिवारिक न्यायालय संख्या 2 के न्यायाधीश वरुण तलवार ने सुनवाई के बाद खुशबू का बाल विवाह निरस्त करने का फैसला सुनाया।
कोर्ट ने साफ संदेश दिया कि बाल विवाह से बच्चों का वर्तमान और भविष्य दोनों अंधकारमयी हो जाते हैं। बाल विवाह की कुरीति को खत्म करने के लिए समाज को प्रेरक पहल करनी होगी।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश