मणिहारों के कटला में लगी आग की लपटें 25 दुकानों तक पहुंची
जयपुर, 17 सितंबर (हि.स.)। माणक चौक थाना के त्रिपोलिया बाजार स्थित मणिहारों के कटला में गुरुवार सुबह भीषण आग से अफरा-तफरी मच गई। तीन मंजिला सेठी कॉम्प्लेक्स में सुबह करीब सात बजे लगी आग देखते ही देखते कई दुकानों और गोदामों तक फैल गई। चूड़ियों, कपड़ों, प्लास्टिक के सामान, कॉस्मेटिक और खिलौनों सहित बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री होने से आग ने विकराल रूप ले लिया। करीब 25 दुकानें आग की चपेट में आने की जानकारी सामने आई है। दमकल की 25 से 30 गाड़ियां और सिविल डिफेंस की टीमें कई घंटे तक आग बुझाने में जुटी रहीं। दोपहर तक करीब 18 दुकानों की आग पर काबू पाने की बात सामने आई, जबकि कुछ दुकानों में आग और धुआं बना हुआ था।
माणक चौक थाना अधिकारी राकेश ख्यालिया के अनुसार प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट सामने आया है। हालांकि आग लगने के वास्तविक कारण और नुकसान का आकलन दमकल की कार्रवाई पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा। कॉम्प्लेक्स में कपड़ों के गोदाम, चूड़ी-मणिहारी सामान, प्लास्टिक और कॉस्मेटिक सामग्री सहित कई तरह का सामान रखा था। दुकानों के बाहर बरामदों में भी बड़ी मात्रा में कपड़े, कार्टन और अन्य सामान रखा होने से आग तेजी से फैलती गई। दूसरी मंजिल स्थित कॉस्मेटिक की दुकान का सामान जलकर राख हो गया। कई दुकानों के शटर तोड़कर सामान बाहर निकालने का प्रयास किया गया। व्यापारी भी अपनी दुकानों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाते नजर आए।
प्रत्यक्षदर्शी गार्ड विक्रम सिंह ने बताया कि छोटू भाई के मणिहारी सामान के गोदाम में आग लगी थी। उस समय वह तीन सफाईकर्मियों के साथ अंदर मौजूद था। आग बढ़ने पर ताला तोड़कर शटर ऊपर किया और बाहर निकलकर जान बचाई। शटर गर्म होने के कारण उसका हाथ भी झुलस गया। उसने बताया कि गोदाम के बाहर बरामदे में भी भारी मात्रा में सामान रखा था। जिससे आग तेजी से फैल गई।
आग के बीच कॉम्प्लेक्स में रखे पांच कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों ने भी खतरा बढ़ा दिया। नगर निगम अजमेर के फायरमैन मुकेश बुनकर ने बताया कि उसे सिलेंडरों की जानकारी मिली तो उसने तत्काल उन्हें बिल्डिंग से हटाकर सुरक्षित स्थान पर रखवाया। इससे संभावित बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय निवासी राजेंद्र ने आरोप लगाया कि बिल्डिंग में रखे सिलेंडरों को फायर सेफ्टी अधिकारियों के पहुंचने से पहले हटाया गया। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
आग के बाद सेठी कॉम्प्लेक्स में लगे फायर सेफ्टी उपकरणों की स्थिति पर भी सवाल उठे। स्थानीय व्यापारियों और लोगों का आरोप है कि उपकरण लगे होने के बावजूद वे सक्रिय स्थिति में नहीं थे। माणक चौक थाना अधिकारी राकेश ख्यालिया ने बताया कि दुकान मालिक या भवन के पास फायर एनओसी थी या नहीं, इसकी जांच की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि दुकानों के बाहर और बरामदों में क्षमता से अधिक सामान रखा जाता है। इससे न केवल आवागमन प्रभावित होता है, बल्कि आग जैसी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य भी मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय व्यापारी अनीस चंदवानी ने आरोप लगाया कि सेठी कॉम्प्लेक्स की ऊपरी मंजिल पर अवैध रूप से रेस्टोरेंट और होटल का निर्माण कराया जा रहा है। इसके लिए सुबह के समय वेल्डिंग का काम भी किया जाता है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने पहले भी इसका विरोध करने तथा नगर निगम में शिकायत करने की बात कही। व्यापारियों ने आशंका जताई कि वेल्डिंग से निकली चिंगारी से आग लगी हो सकती है, हालांकि पुलिस की प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को कारण माना गया है। कुछ व्यापारियों ने दूसरी मंजिल पर रेस्टोरेंट संचालित होने का भी आरोप लगाया और पूर्व में मकर संक्रांति के दौरान छत पर आग लगने की घटना का हवाला दिया।
किशनपोल विधायक अमीन कागजी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि परकोटे में अवैध कब्जों और निर्माणों को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही हैं। उनका आरोप है कि सरकार की देखरेख में अवैध कब्जे हो रहे हैं और इससे जयपुर के हेरिटेज स्वरूप को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि पौने तीन साल में प्रशासन ने एक बार भी फायर सिस्टम की जांच नहीं की। कागजी ने परकोटे में जारी फायर एनओसी की दोबारा जांच कराने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि 19 नवंबर को इसी तरह के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को बुलाया है। उनके अनुसार वे सरकार और प्रशासन को लगातार पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग करते रहे हैं।
हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि उन्हें यहां अवैध रूप से होटल निर्माण किए जाने की जानकारी मिली है, जिस पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि फायर सिस्टम प्रभावी नहीं था तो फायर एनओसी कैसे जारी हुई। उन्होंने एनओसी जारी करने वाले अधिकारियों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
आचार्य ने पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्मार्ट सिटी के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों रुपए की भी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस की सरकार और कांग्रेस का नगर निगम था तथा अधिकारियों ने पैसा कहां और कैसे लगाया, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने फायर सिस्टम से जुड़े पुराने कार्यों की भी जांच की मांग की।
आग से उठता काला धुआं सुभाष चौक से चांदपोल तक दिखाई दिया। आसपास के लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन की शिकायत हुई। एहतियात के तौर पर क्षेत्र की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। बनीपार्क, घाटगेट, चौगान और आमेर सहित अन्य स्थानों से भी दमकल की गाड़ियां बुलाई गईं। 20 से अधिक सिविल डिफेंस कर्मचारी राहत कार्य में जुटे रहे।
आग के कारण परकोटे के करीब चार किलोमीटर क्षेत्र में यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। बड़ी चौपड़, जौहरी बाजार और त्रिपोलिया बाजार में जाम के हालात बन गए। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर यातायात डायवर्ट किया और मौके से भीड़ हटाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। संकरी गलियों और घनी आबादी वाले बाजार के कारण दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने और लगातार फेरे लगाने में भी चुनौती का सामना करना पड़ा। आग की तपिश से पास की एक दुकान की दीवार भी टूटकर गिर गई। जिससे आसपास के क्षेत्र में फिर आग फैलने का खतरा पैदा हो गया।
एहतियात के तौर पर घटनास्थल के आसपास के बाजारों में दुकानें नहीं खुलने दी गईं। पुरोहितजी का कटला बंद रखा गया और प्रवेश द्वार पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए। बड़ी संख्या में व्यापारी और स्थानीय लोग मौके पर जमा रहे। दुकानदार अपनी दुकानों का सामान बचाने और सुरक्षित स्थान पर ले जाने में जुटे रहे।
सिविल डिफेंस कर्मचारी राकेश सेन ने बताया कि आग प्रभावित दुकानों के शटर तोड़कर अंदर पहुंचने का प्रयास किया गया। बरामदों में रखा सामान हटाया गया। चूड़ी का सामान, कार्टन, कपड़े और अन्य ज्वलनशील सामग्री अधिक मात्रा में होने के कारण आग पर काबू पाने में परेशानी हुई। करीब 18 दुकानों की आग पर नियंत्रण की जानकारी दी गई, जबकि कुछ स्थानों पर आग और धुआं बना रहा। दमकल की गाड़ियां लगातार पानी के फेरे लगाती रहीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश