किसान कौशल विकास केंद्र में किसानों को प्राकृतिक खेती का बताया महत्व

 


जोधपुर, 25 जून (हि.स.)। कृषि विश्वविद्यालय के किसान कौशल विकास केंद्र की ओर से विश्वविद्यालय के गोदित गांव बिंजवाडिय़ा में प्राकृतिक खेती जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों, जैविक खाद के उपयोग एवं फसलों में प्राकृतिक रूप से कीट एवं रोग प्रबंधन के उपायों के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम में किसान कौशल विकास केंद्र की नोडल अधिकारी डॉ. प्रियंका स्वामी ने विश्वविद्यालय एवं किसान कौशल विकास केंद्र की विभिन्न गतिविधियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा किसानों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी प्रदान की। उन्होंने किसानों को केंद्र से जुडक़र नवीन कृषि तकनीकों का लाभ लेने का आह्वान किया। प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. प्रियंका ने प्राकृतिक खेती के महत्व, जैविक खाद निर्माण एवं उसके उपयोग की वैज्ञानिक जानकारी किसानों को दी।

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि होती है तथा खेती की लागत को कम किया जा सकता है। प्रशिक्षण अधिकारी नीलिमा मकवाना ने फसलों में प्राकृतिक रूप से कीट एवं रोग नियंत्रण के विभिन्न उपायों, जैविक विधियों तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को रासायनिक कृषि आदानों के संतुलित उपयोग एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान सुभाष बाजिया ने क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त फसलों की उन्नत किस्मों एवं उनकी वैज्ञानिक खेती की जानकारी किसानों को प्रदान की। प्रशिक्षण के पश्चात कृषि विशेषज्ञों की टीम द्वारा किसानों के खेतों का भ्रमण किया गया। इस दौरान फसलों में आ रही समस्याओं का निरीक्षण कर रोगग्रस्त पौधों के नमूने एकत्र किए गए। प्राप्त नमूनों की जांच कृषि अनुसंधान केंद्र के सह आचार्य डॉ. अशोक मीणा द्वारा की गई तथा किसानों को रोगों की पहचान एवं उचित निदान की जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने प्राकृतिक खेती से संबंधित नवीन तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। किसानों ने कृषि विश्वविद्यालय एवं किसान कौशल विकास केंद्र द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना की।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश