पेशाब की छोटी परेशानी भी हो सकती है बड़ी बीमारी का संकेत: डॉ. अभिषेक चारण
जयपुर, 15 सितंबर (हि.स.)। उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में पेशाब से जुड़ी समस्याएं आम हो जाती हैं, लेकिन इन्हें केवल उम्र या प्रोस्टेट बढ़ने का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एचसीजी कैंसर हॉस्पिटल जयपुर के कंसल्टेंट-मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. अभिषेक चारण के अनुसार बार-बार पेशाब आना, रात में कई बार उठना, पेशाब शुरू करने में परेशानी या धार कमजोर होना कुछ मामलों में प्रोस्टेट कैंसर से भी जुड़ा हो सकता है।
प्रोस्टेट मूत्राशय के नीचे स्थित छोटी ग्रंथि है। हालांकि, ऐसे लक्षण केवल कैंसर के कारण नहीं होते। बढ़ा हुआ प्रोस्टेट (बीपीएच), सूजन या संक्रमण भी इसकी वजह हो सकते हैं। प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती चरण में कई बार कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। बाद में पेशाब में दिक्कत, रुक-रुककर या कमजोर धार, पेशाब या वीर्य में खून तथा पीठ, कूल्हे या पेल्विस में दर्द हो सकता है।
डॉक्टर उम्र, पारिवारिक इतिहास और लक्षणों के आधार पर जांच की सलाह देते हैं। पीएसए रक्त जांच उपयोगी हो सकती है, लेकिन इसका स्तर बीपीएच, संक्रमण या सूजन में भी बढ़ सकता है। इसलिए केवल पीएसए रिपोर्ट से कैंसर की पुष्टि नहीं की जा सकती। आशंका होने पर एमआरआई और जरूरत के अनुसार प्रोस्टेट बायोप्सी कराई जा सकती है।
डॉ. चारण के अनुसार हर प्रोस्टेट कैंसर में तत्काल उपचार जरूरी नहीं होता। शुरुआती और कम जोखिम वाले मामलों में सक्रिय निगरानी के तहत पीएसए व अन्य जांचों से बीमारी पर नजर रखी जा सकती है। बीमारी की अवस्था और जोखिम के अनुसार सर्जरी, रेडिएशन या अन्य उपचार की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि पेशाब से जुड़ी नई या लगातार समस्या होने पर समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है, ताकि सही कारण का पता लगाकर गंभीर बीमारी होने पर समय रहते उपचार किया जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश