ई-रिक्शा पंजीयन ने नहीं पकड़ी रफ्तार: चार दिन में 50 का आंकड़ा छूआ
जयपुर, 05 अगस्त (हि.स.)। राजधानी में परकोटे, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम करने के लिए शुरू की गई ई-रिक्शा की जोनवार पंजीयन व्यवस्था को अपेक्षित गति नहीं मिल रही है। एक अगस्त से शुरू हुई पंजीयन प्रक्रिया के चार दिन बाद भी 100 का आंकड़ा नहीं छू सकी है। अब तक करीब 300 से अधिक लोगों ने जानकारी ली है, लेकिन केवल करीब 50 ई-रिक्शा का ही पंजीयन हो पाया है। इस स्थिति को देखते हुए यातायात पुलिस ने डीसीपी ट्रैफिक कार्यालय (यादगार) में ई-मित्र सुविधा केंद्र शुरू किया है, जहां ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन माध्यम से भी पंजीयन कराया जा रहा है।
एडिशनल डीसीपी (ट्रैफिक) रानू शर्मा ने बताया कि जयपुर में संचालित करीब 40 हजार ई-रिक्शा को सात जोन में संचालित करने के लिए एक अगस्त से पंजीयन प्रक्रिया शुरू की गई है। शुरुआती दिनों में बड़ी संख्या में संचालकों ने जानकारी ली। लेकिन पंजीयन कम हुआ। इसकी मुख्य वजह अधिकांश चालकों के पास स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस का नहीं होना तथा ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी का अभाव है। कई चालक केवल लर्निंग लाइसेंस पर ई-रिक्शा चला रहे हैं, जबकि कई संचालक कम पढ़े-लिखे होने के कारण ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
यातायात पुलिस के अनुसार बड़ी संख्या में ई-रिक्शा महिलाओं और दिव्यांगों के नाम पर पंजीकृत हैं, जबकि उनका संचालन अन्य लोग करते हैं। ऐसे मामलों में चालक अंडरटेकिंग देकर पंजीयन करा सकते हैं। जिनके पास स्थायी लाइसेंस नहीं है, उन्हें पहले लर्निंग लाइसेंस बनवाकर एक माह बाद स्थायी लाइसेंस लेने की सलाह दी जा रही है।
ई-रिक्शा संचालकों की सुविधा के लिए डीसीपी ट्रैफिक कार्यालय (यादगार) में स्थायी ई-मित्र सेवा केंद्र शुरू किया गया है। यहां नियुक्त ई-मित्र कर्मी पंजीयन प्रक्रिया की जानकारी देने के साथ आवेदन भरने और दस्तावेज अपलोड कराने में सहायता कर रहे हैं। जिन संचालकों को ऑनलाइन आवेदन में परेशानी हो रही है, उनके लिए ऑफलाइन पंजीयन की भी व्यवस्था की गई है।
यातायात पुलिस ने शहर को सात जोन में विभाजित किया है। प्रत्येक ई-रिक्शा को निर्धारित जोन के अनुसार रंग और क्यूआर कोड दिया जाएगा। बारकोड स्कैन करते ही वाहन और चालक की पूरी जानकारी सामने आ जाएगी। सिस्टम में एसओएस सुविधा भी होगी, जिससे आपात स्थिति में सीधे पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना पहुंचेगी।
हर जोन में ई-रिक्शा की संख्या निर्धारित की गई है। आवेदन के दौरान संचालक द्वारा दी गई प्राथमिकता के आधार पर जोन आवंटित किया जाएगा। यदि किसी जोन की निर्धारित संख्या पूरी हो जाएगी तो आवेदक को उसकी दूसरी प्राथमिकता वाले जोन में स्थान दिया जाएगा।
यातायात पुलिस के अनुसार पंजीयन प्रक्रिया 1 अगस्त से 31 अगस्त तक चलेगी। इसके बाद 15 सितंबर से बिना पंजीयन अथवा निर्धारित जोन से बाहर संचालित होने वाले ई-रिक्शा के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऐसे वाहनों को ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा। इसके लिए डीसीपी ट्रैफिक कार्यालय में मॉनिटरिंग सेल बनाया गया है, जहां तकनीकी माध्यम से सभी पंजीकृत ई-रिक्शा की निगरानी की जाएगी।
ई-रिक्शा संचालक https://erickshaw jaipurpolice.rajasthan.gov.in पर जाकर ऑनलाइन पंजीयन करा सकते हैं। वेबसाइट से 'erickshawjaipur' एंड्रॉयड एप भी डाउनलोड किया जा सकता है। इसके अलावा नजदीकी ई-मित्र केंद्र या यातायात पुलिस नियंत्रण कक्ष, अजमेरी गेट स्थित सुविधा केंद्र पर भी पंजीयन कराया जा सकता है।
वाहन का पंजीयन प्रमाण पत्र (आरसी), वैध फिटनेस प्रमाण पत्र,वैध बीमा प्रमाण पत्र,चालक की पासपोर्ट आकार की फोटो और वैध ड्राइविंग लाइसेंस। आवेदन में दर्ज सभी जानकारियों का ऑनलाइन एपीआई के माध्यम से सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन सही पाए जाने पर ही आवेदन स्वीकार किया जाएगा।
पूर्व जोन: 5,000 ई-रिक्शा, लाल कलर कोड
पश्चिम जोन: 9,000 ई-रिक्शा, लाल कलर कोड
उत्तर जोन: 6,000 ई-रिक्शा, नीला कलर कोड
दक्षिण जोन: 7,500 ई-रिक्शा, पीला कलर कोड
सेंट्रल जोन: 2,000 ई-रिक्शा, नारंगी कलर कोड
परकोटा जोन: 500 ई-रिक्शा, गुलाबी कलर कोड
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश