बुजुर्ग के सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया डबल चैम्बर लीडलेस पेसमेकर

 


जोधपुर, 02 जुलाई (हि.स.)। पाल रोड स्थित श्रीराम अस्पताल ने हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया के अत्याधुनिक डबल चैम्बर लीडलेस पेसमेकर का सफल प्रत्यारोपण किया है। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन कुमार सारडा के नेतृत्व में 67 वर्षीय मरीज का यह जटिल प्रोसीजर सफलतापूर्वक किया गया।

डॉ. सारडा ने बताया कि मरीज को हृदय की धडक़न अत्यधिक धीमी होने की समस्या के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पारंपरिक पेसमेकर की तुलना में लीडलेस पेसमेकर तकनीक अधिक सुरक्षित और उन्नत है। इसमें छाती पर चीरा लगाने या बैटरी व लीड लगाने की आवश्यकता नहीं होती। कैप्सूल के आकार की दो डिवाइस पैर की शिरा के माध्यम से सीधे हृदय के एट्रियम और वेंट्रिकल में स्थापित की जाती हैं, जो आपस में समन्वय बनाकर हृदय की धडक़न को मरीज की आवश्यकता के अनुसार नियंत्रित करती हैं।

उन्होंने बताया कि इस तकनीक से संक्रमण, लीड फ्रैक्चर, लीड के खिसकने, ट्राइकस्पिड वाल्व की क्षति तथा फेफड़ों में पानी भरने जैसी जटिलताओं का जोखिम काफी कम हो जाता है। साथ ही इसकी बैटरी की आयु लगभग 20 से 22 वर्ष होती है, जिससे अधिकांश मामलों में एक ही प्रक्रिया पर्याप्त रहती है।

यह प्रोसीजर श्रीराम अस्पताल की कैथ लैब में लोकल एनेस्थीसिया के तहत लगभग एक घंटे में पूरा किया गया। मरीज दो घंटे बाद ही चलने-फिरने लगा और उपचार के अगले दिन स्वस्थ अवस्था में उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश