महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट के लिए 275.68 करोड़ की डीपीआर तैयार

 


जयपुर, 24 फ़रवरी (हि.स.)। उप मुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी ने मंगलवार को विधानसभा में जानकारी दी कि राज्य सरकार ने महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट विकास योजना की क्रियान्विति के लिए 275.68 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करवा ली है। इस डीपीआर को तीन फरवरी 2026 को राजस्थान धरोहर प्राधिकरण की अध्यक्षता में गठित समीक्षा समिति द्वारा अनुमोदित किया जा चुका है।

प्रश्नकाल के दौरान विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी नए पर्यटन सर्किट के विकसित होने से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। राज्य सरकार की प्राथमिकता रहेगी कि स्थानीय लोगों को अधिक से अधिक रोजगार मिले। इस परियोजना से स्थानीय मटेरियल सप्लायर्स, श्रमिकों, टूर ऑपरेटरों, गाइडों, होटल व्यवसायियों, पार्किंग, कैफेटेरिया, सोवेनियर शॉप्स, हैंडीक्राफ्ट्स एवं होमस्टे से जुड़े लोगों को आर्थिक लाभ मिलेगा।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े चावण्ड, हल्दीघाटी, गोगुन्दा, कुम्भलगढ़, दिवेर और उदयपुर सहित विभिन्न स्थलों को जोड़ते हुए इस टूरिस्ट सर्किट का विकास किया जाएगा। राज्य बजट वर्ष 2024-25 के तहत 8 फरवरी 2024 को प्रस्तुत बजट वक्तव्य के पैरा 55 में इस सर्किट के लिए 100 करोड़ रुपये के प्रावधान की घोषणा की गई थी।

उन्होंने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन के लिए राजस्थान राज्य सड़क विकास निगम एवं राजस्थान धरोहर प्राधिकरण को कार्यकारी एजेंसी नियुक्त किया गया है। परियोजना के कार्यों की मॉनिटरिंग राजस्थान धरोहर प्राधिकरण द्वारा की जाएगी, जबकि जिला स्तर पर परिसंपत्तियों के संचालन और रखरखाव के लिए स्थानीय निकायों से परामर्श लेकर प्रबंधन किया जाएगा। नियमित पर्यवेक्षण जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला पर्यटन विकास समिति के माध्यम से होगा।

उन्होंने बताया कि डीपीआर तैयार करने के लिए जनवरी 2025 में 100 करोड़ रुपये की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई थी। परियोजना की कॉन्सेप्ट प्रोजेक्ट रिपोर्ट (सीपीआर) तैयार करने पर दो लाख 83 हजार 500 रुपये खर्च किए गए। मेवाड़ के गौरव और जन आस्था से जुड़े इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार करने के लिए विभिन्न स्तरों पर बैठकें आयोजित कर सुझाव लिए गए, जिसके बाद डीपीआर तैयार की गई। वर्तमान में डीपीआर की वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है। स्वीकृति के बाद विकास कार्य प्रारंभ किए जाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित