ऊंटों पर सवार होकर डीएनटी समाज ने कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन, एक जुलाई को जयपुर में महापड़ाव की चेतावनी
बांसवाड़ा, 05 जून (हि.स.)। वंचित ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग से जुड़े डीएनटी (डीनोटिफाइड, घुमंतू एवं अर्धघुमंतू) समाज के अधिकारों को लेकर शुक्रवार को बांसवाड़ा में बड़ा जनआक्रोश देखने को मिला। राष्ट्रीय पशुपालक संघ, डीएनटी संघर्ष समिति और मूल ओबीसी महापंचायत के संयुक्त तत्वावधान में जेल भरो आंदोलन आयोजित किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।
तेज धूप और गर्मी के बावजूद आंदोलनकारी ऊंटों पर सवार होकर रैली के रूप में जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के बाहर नारेबाजी करते हुए पुतला दहन किया और बाद में मुख्यमंत्री के नाम 11 सूत्रीय मांगपत्र जिला कलेक्टर को सौंपा। डीएनटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लालजी राईका ने कहा कि समाज की सबसे बड़ी मांग डीएनटी वर्ग को अलग से 10 प्रतिशत आरक्षण देने की है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न आयोगों ने पहले भी इस संबंध में सिफारिशें की हैं और समाज को उसके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में डीएनटी समाज की आबादी लगभग 1.23 करोड़ है, लेकिन शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उसे अपेक्षित भागीदारी नहीं मिल रही है।
समाज ने 10 प्रतिशत राजनीतिक भागीदारी, आवासीय पट्टे, भूमि अधिकार और शिक्षा संबंधी सुविधाओं की भी मांग उठाई है।
आंदोलनकारियों ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख शर्तें भी रखीं। इनमें मुख्यमंत्री स्तर पर सीधी वार्ता, पहले दौर की बातचीत के आधार पर समाधान का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करना तथा वार्ता की तिथि और समय की तत्काल घोषणा करना शामिल है। समिति के सह-अध्यक्ष रतननाथ कालबेलिया ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व में हुए महापड़ाव के बाद सरकार ने तीन महीने का समय मांगा था, लेकिन पांच माह बीत जाने के बावजूद मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारियों पर मुकदमे दर्ज किए गए और कई लोगों को जेल भी भेजा गया। लालजी राईका ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि एक जुलाई को जयपुर में विशाल महापड़ाव आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रदेशभर से डीएनटी समाज के लोग भाग लेंगे।
राष्ट्रीय पशुपालक संघ के जिलाध्यक्ष प्रभुजी राईका ने कहा कि समाज के युवाओं को अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसरों की लड़ाई है।
आंदोलन में विभिन्न सामाजिक संगठनों और समुदायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रदर्शन में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। समाज के नेताओं ने कहा कि जब तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित