गुरू पूजन तथा समर्पण का पर्व है गुरु पूर्णिमा : शर्मा
धौलपुर, 01 अगस्त (हि.स.)। राजकीय महाविद्यालय धौलपुर में शनिवार को गुरू पूर्णिमा पर्व के उपलक्ष्य में ‘गुरु वंदन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में गुरू की महिमा तथा गुरू शिष्य परंपरा पर सार्थक मंथन हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भरतपुर विभाग के कुटुंब प्रबोधन संयोजक अनुराग शर्मा ने गुरु पूर्णिमा की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु वह व्यक्तित्व है जो अपने शिष्य को स्वयं से भी आगे बढ़ते हुए देखने की आकांक्षा रखता है। उन्होंने भगवान श्रीराम, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि वेदव्यास, श्रीकृष्ण-बलराम, ऋषि संदीपनि, मीराबाई–रैदास, स्वामी विवेकानंद–रामकृष्ण परमहंस, महर्षि दयानंद सरस्वती तथा छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे प्रेरक उदाहरणों के माध्यम से भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता स्पष्ट की। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं गुरु-शिष्य संस्कृति के समावेश पर भी विस्तार से जानकारी दी।
विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) के जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा ने भारतीय ज्ञान परंपरा, विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, आध्यात्मिक ऊर्जा के सकारात्मक प्रभाव तथा सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभावों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों से भारतीय संस्कारों एवं जीवन मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. गिर्राज सिंह मीना ने कहा कि माता-पिता के पश्चात गुरु का स्थान सर्वोच्च होता है। उन्होंने वर्तमान समय में गुरु-शिष्य संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने, भारतीय संस्कृति में गुरु के महत्व तथा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में गुरु की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्र गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥ का सामूहिक उच्चारण किया गया। संचालन शैक्षिक महासंघ के जिला सचिव प्रोफेसर सोहराब शर्मा ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय इकाई सचिव का दायित्व राम कुमार मीना (सहायक आचार्य, भौतिक विज्ञान) तथा सह-सचिव का दायित्व विष्णु कुमार (सहायक आचार्य, भौतिक विज्ञान) को प्रदान किया गया। अंत में डॉ. विश्वम्भर दयाल पाराशर ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के आचार्यगण, समस्त स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रदीप