लखवीरसिंह लक्खा के भजनों पर तड़के तक झूमे श्रद्धालु
उदयपुर, 1 जनवरी (हि.स.)। उदयपुर के इतिहास में पहली बार एक साथ हजारों की तादाद में एकत्रित श्रद्धालुओं ने सनातनी संस्कारों, धर्म की गहन आस्था के साथ नए वर्ष का स्वागत धूमधाम से किया। यह दृश्य मीरा नगर के विशाल प्रांगण में कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु पूज्यपाद वसन्त विजयानन्द गिरी जी महाराज के पावन सानिध्य में चल रहे श्री महालक्ष्मी कोटि कुंकुमार्चन यज्ञ पूजा साधना महामहोत्सव में 31 दिसंबर की रात्रि देखने को मिला।
महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष नानालाल बया, महामंत्री देवेन्द्र मेहता ने बताया कि दैनिक साधना और महालक्ष्मी यज्ञ के पश्चात जगद्गुरु वसन्त विजयानन्द गिरी जी महाराज के श्रीमुख से कही जा रही एकलिंगजी शिव पुराण कथा में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। गुरुदेव ने कथा के आरंभ में मृदंडी ऋषी पुत्र के जीवन के अंतिम सोलहवें वर्ष का वृतांत विस्तारपूर्वक सुनाया। विभिन्न पौराणिक पात्रों के जीवन चरित्र और भूमिका का विस्तार से वर्णन किया। गुरुदेव ने बताया सात समंदर सहित सृष्टि की परिक्रमा के बराबर पुण्य केवल भगवान एकलिंगनाथ जी की परिक्रमा से मिल जाता है। पुराणों में उल्लेखित समस्त देवी देवताओं की उपस्थिति भगवान एकलिंगनाथ जी के इर्दगिर्द रहती है। क्योंकि देवताओं को पाषाण स्वरूप में भगवान एकलिंगनाथ जी के चारों ओर विद्यमान हैं। यही कारण है कि वर्तमान राजस्थान में विभिन्न स्थानों पर विश्व ज्योति भगवान एकलिंगजी के साथ समस्त देवी देवताओं के मंदिर स्थित हैं।
जगद्गुरु वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज ने पांडाल में उपस्थित जनसमुदाय को शिव कृपा डोरा 27 बार पवित्र मंत्रोच्चार कर तैयार करवाया। यह सर्वसिद्धि और सभी प्रकार के कष्टों का निवारक है। इसके साथ ही हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रोच्चार के साथ गुरुदेव ने गुरू दीक्षा दी। इस अवसर पर पांडाल मां पद्मावती और जगदगुदेव के जयकारों से गूंज उठा।
लक्खा के भजनों पर खूब थिरके भक्त
जगद्गुरु वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज से आशीर्वाद लेकर प्रसिद्ध भजन गायक लखबीरसिंह लक्खा द्वारा इस धर्म ममहोत्सव में सुमधुर स्वर लहरियां गुंजाई गई। उनके हर भजन पर श्रद्धालु खुद को थिरकने से रोक न सके। लखवीरसिंह ने प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी भजन से सिलसिला आरंभ किया जो रात के तीसरे प्रहर तक चलता रहा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने भजनों का जमकर आनंद लिया। लखवीरसिंह लक्खा ने लाल लाल चुनरी, मैया का चोला, कीजो केसरी के लाल और खाटू श्याम की आराधना के भजन सहित एक से बढ़कर एक सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियों से समा बांध दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव