देवनानी ने चार गौशालाओं को दिए 20 लाख रुपये, गौ संरक्षण को बताया सामूहिक दायित्व

 




जयपुर, 20 फ़रवरी (हि.स.)। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने गौ संरक्षण एवं गौ सेवा के क्षेत्र में अनुकरणीय पहल करते हुए भामाशाहों के सहयोग से जयपुर और अजमेर की चार गौशालाओं को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है। यह राशि अमरापुर गौशाला, माधव गौ विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, पुष्कर गौशाला तथा आनंद गोपाल गौशाला को दी गई।

देवनानी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में दान, सेवा, त्याग और पुण्य का विशेष महत्व है। यह सहयोग केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति, आस्था और ग्राम्य जीवन की आत्मा है तथा कृषि परंपरा, प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पादों और पर्यावरण संतुलन में गौवंश की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने बताया कि गौशालाएं केवल निराश्रित एवं परित्यक्त गौवंश की शरणस्थली नहीं हैं, बल्कि समाज की करुणा और दायित्वबोध की जीवंत मिसाल भी हैं।

माधव गौ विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान पंचगव्य आधारित शोध, जैविक कृषि और स्वदेशी उत्पादों के विकास में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है, जो परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का उदाहरण है।

पुष्कर गौशाला और अमरापुर गौशाला वर्षों से हजारों गौवंश की सेवा, चिकित्सा और संरक्षण के लिए कार्यरत हैं। इन संस्थाओं में चारा, चिकित्सा सुविधा, आश्रय व्यवस्था और रखरखाव के लिए निरंतर आर्थिक सहयोग की आवश्यकता रहती है।

आनंद गोपाल गौशाला भी समाज के सहयोग से सेवा कार्यों का संचालन कर रही है।

देवनानी ने कहा कि गौ संरक्षण आध्यात्मिक कर्तव्य होने के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरणीय संतुलन का विषय भी है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार गौशालाओं के सहयोग के लिए आगे आएं और इसे जनभागीदारी का अभियान बनाएं।

उन्होंने भामाशाहों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की सामूहिक शक्ति ही ऐसे सेवा कार्यों को गति देती है।

यह 20 लाख रुपये की सहायता राशि चारा क्रय, चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण, आधारभूत संरचना के विकास तथा गौवंश संरक्षण कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

देवनानी ने कहा कि मकर संक्रांति के पावन अवसर पर किया गया यह सहयोग समाज में सेवा और दान की परंपरा को नई ऊर्जा देगा तथा गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता को मजबूत बनाएगा। उन्होंने इसे सामाजिक सहभागिता, आध्यात्मिक मूल्यों और सतत विकास के समन्वित मॉडल की दिशा में सार्थक पहल बताया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित