राजनीति से ऊपर उठकर ज्ञान सारस्वत की तबीयत पूछने अस्पताल पहुंच देवनानी और राठौड़

 


अजमेर, 04 सितम्बर(हि.स.)।स्थानीय निकाय चुनावों के बीच राजनीति के विरोधियों में आपसी मानवीय सौहार्द शुक्रवार को देखने को मिला जब विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी उनके खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़े पूर्व पार्षद ज्ञान सारस्वत की तबीयत पूछने के लिए क्षेत्रपाल हॉस्पिटल पहुंच गए। पीछे पीछे कांग्रेस के दावेदार एवं पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ भी कुशल क्षेम पूछने सारस्वत के पास पहुंचे।

देवनानी ने इस दौरान अस्पताल के डॉक्टरों को भी बेहतर इलाज करने के निर्देश दिए। बताते हैं कि वार्ड के लोगों से ही जब देवनानी को जानकारी मिली कि सारस्वत फ्रैक्चर होने से अस्पताल में हैं, वे सीधे वहां गए। अभी पिछले दिनों से स्थानीय निकाय चुनाव व अन्य पूर्व निजी कारणों से देवनानी, सारस्वत और धर्मेंद्र गहलोत को लेकर राजनीतिक वाकयुद्ध और सियासी सरगर्मियां तेज हो रखी है। देवनानी खामोशी से अपने काम में जुटे हुए हैं। वहीं गहलोत द्वारा किए जा रहे सवालों की बौछारों का भी कोई जवाब नहीं दे रहे हैं।

शुक्रवार को भी गहलोत ने एक नया आॅडियो जारी कर देवनानी पर फिर हमला किया और सवालों के जख्म दिए। उन्होंने देवनानी पर वार्ड संख्या 4 के लोगों को फोन कर झूठे आश्वासन देने, विकास के झूठे वादे करने के भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देवनानी ने तो सिर्फ उन्हें ही नहीं उनके बेटे को भी जख्म देने से परहेज नहीं किया। यही वजह है कि गहलोत बार बार यही बोल रहे है कि वह भाजपा के विरोधी नहीं है बल्कि देवनानी के विरोधी हैं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के यह बात गले नहीं उतर रही है क्यों निर्दलीय चुनाव लड़कर वह भाजपा पर ही हमला कर रहे हैं। सारस्वत और उनकी पुत्री भी चुनाव मैदान में उतरने वाली थीं लेकिन ऐन वक्त पर वह जनता के सामने किए गए वादे को लेकर पीछे हट गए। सारस्वत वार्ड तीन में संध्या काबरा और देवनानी के निवास वाले वार्ड 4 में पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत की पत्नी हेमा गहलोत के समर्थन में हैं और दोनों ही वार्ड अजमेर उत्तर में होने से देवनानी की प्रतिष्ठा का सवाल बने हुए हैं। लोगों का मानना है कि सारस्वत और देवनानी के बीच राजनीतिक कड़वाहट भले ही हो लेकिन दोनों के बीच मधुर संबंध कायम हैं। देवनानी की पत्नी के स्वर्गवास होने पर ज्ञान सारस्वत भी तत्काल ना केवल उनके निवास पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे बल्कि अंतिम यात्रा में भी शामिल रहे। दोनों के बीच कभी हॉट टॉक नहीं हुई। जबकि ज्ञान सारस्वत ने देवनानी के ही सामने विधानसभा चुनाव तक लड़ा था। सारस्वत ने चुनाव लड़ने से पहले ही भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन उन्होंने कभी देवनानी के बारे में सार्वजनिक तौर पर कभी कटु शब्द नहीं कहे। मालूम हो कि सारस्वत फ्रैक्चर होने से वहां भर्ती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष