मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की मांग फिर तेज, कांग्रेस बोली- आदिवासी शहीदों को मिले ऐतिहासिक सम्मान
उदयपुर, 09 अगस्त (हि.स.)। विश्व आदिवासी दिवस और अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ गई। उदयपुर में कांग्रेस नेताओं और आदिवासी संगठनों ने अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर केंद्र और राज्य सरकार से मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग उठाई।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मानगढ़ धाम आदिवासी समाज की आस्था, इतिहास और बलिदान से जुड़ा स्थल है और इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलना शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उदयपुर देहात और शहर जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से रेजीडेंसी स्कूल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में संयोजक और उदयपुर लोकसभा प्रत्याशी ताराचंद मीणा ने कहा कि लोकसभा में मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने को लेकर पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि केंद्र सरकार के पास फिलहाल मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की कोई योजना नहीं है। साथ ही राज्य सरकारों की ओर से भी इस संबंध में कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं होने की बात कही गई है।
मीणा ने कहा कि केंद्र सरकार के इस जवाब से आदिवासी समाज में निराशा और रोष है। उन्होंने भाजपा पर आदिवासी समाज को भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मानगढ़ धाम केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आस्था, संघर्ष और बलिदान की पहचान है। उन्होंने कहा कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किए जाने तक संघर्ष जारी रहेगा।
उदयपुर देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि मानगढ़ धाम को राजस्थान का 'जलियांवाला बाग' कहा जाता है। वर्ष 1913 में यहां अंग्रेजी शासन की गोलियों से 1500 से अधिक आदिवासी शहीद हुए थे।
उन्होंने कहा कि मानगढ़ धाम राजस्थान के साथ गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के आदिवासी समाज की साझा विरासत है।
उदयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने भी मानगढ़ के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए केंद्र और राज्य सरकार से इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के बैनर तले फतह स्कूल ग्राउंड में भी बड़ा कार्यक्रम हुआ। इसमें उदयपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों के साथ दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पहुंचे। कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत की झलक देखने को मिली।
पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे लोगों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। लोक कलाकारों ने गीत और नृत्य के माध्यम से आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान को मंच पर जीवंत किया। बच्चों और युवाओं में भी कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह नजर आया।
कार्यक्रम में आदिवासी समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर वक्ताओं ने अपनी बात रखी। जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के लिए समाज को एकजुट होने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की जमीन, प्राकृतिक संसाधनों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संगठित होकर आवाज उठाना जरूरी है।
मंच से शिक्षा, सामाजिक एकता, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ संवैधानिक अधिकारों को लेकर भी समाज को जागरूक किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि समाज की आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति और इतिहास से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजन जरूरी हैं।
कार्यक्रम के बाद कांग्रेस पदाधिकारियों ने एडीएम सिटी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें मानगढ़ धाम को जल्द राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मानगढ़ में शहीद हुए आदिवासियों की शहादत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देना न केवल आदिवासी समाज बल्कि देश के इतिहास के साथ न्याय होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित