आयुर्वेद विभाग में सेवानिवृत्त कर्मियों की पुनर्नियुक्ति का विरोध : युवाओं ने उठाई नियमित भर्ती की मांग

 


डूंगरपुर, 04 अगस्त (हि.स.)। आयुर्वेद विभाग में सेवानिवृत्त चिकित्साकर्मियों की पुनर्नियुक्ति

के प्रस्ताव को लेकर प्रदेश के आयुर्वेद स्नातकों, स्नातकोत्तर

युवाओं और प्रतियोगी अभ्यर्थियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस फैसले के विरोध

में समस्त आयुर्वेद युवा संघ के तत्वावधान में युवाओं ने मंगलवार को डूंगरपुर जिला

कलेक्टर के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के

जरिए सेवानिवृत्त कर्मियों की पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने और

राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के माध्यम से पारदर्शी एवं नियमित भर्ती

प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है।

ज्ञापन में बताया गया है कि प्रदेश के आयुर्वेद विभाग में वर्तमान

में लगभग 926 पद रिक्त पड़े हैं, जिनमें से लगभग 899 पद पदोन्नति के माध्यम से

भरे जाने हैं। हालांकि, विभिन्न संवर्गों में पिछले कई वर्षों से डीपीसी प्रक्रिया लंबित

पड़ी है। इसके चलते लगभग 310 चिकित्साधिकारी विभिन्न आयुर्वेद महाविद्यालयों व

विश्वविद्यालयों में कार्यव्यवस्था के तहत कार्यरत हैं। युवाओं ने आरोप लगाया कि

नियमित नियुक्ति के स्थान पर सरकार द्वारा कार्यव्यवस्था, प्रतिनियुक्ति

या यूटीबी जैसी अस्थायी व्यवस्थाओं से काम चलाया जा रहा है, जो राज्य के

योग्य युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

आयुर्वेद युवा संघ के प्रतिनिधि डॉ. कुशराज सिंह सिसोदिया ने बताया

कि आरपीएससी के माध्यम से लंबे समय से आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों की नियमित

भर्ती आयोजित नहीं की गई है, जिससे प्रदेश के हजारों युवाओं के रोजगार के

अवसर प्रभावित हो रहे हैं। ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद

16 का संदर्भ देते हुए मांग की गई है कि पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह

पारदर्शी, प्रतिस्पर्धात्मक और विधिसम्मत होनी चाहिए।

ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल में डॉ. कुशराज सिंह सिसोदिया,

डॉ.

धर्मेन्द्र पाल सिंह, डॉ. दुष्यंत कटारा तथा डॉ. विनय डेंडोर सहित कई आयुर्वेद चिकित्सक व

अभ्यर्थी शामिल रहे। युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों पर

शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष