परिसीमन और महिला आरक्षण पर अशोक गहलोत ने उठाए सवाल, बोले- सरकार का क्या है छिपा एजेंडा?

 


जयपुर, 17 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार विपक्ष को विश्वास में नहीं ले रही है। गहलोत ने केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा करने और व्यापक सहमति से फैसला लेने की मांग की है।

गहलोत ने शनिवार को एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि भारत में परंपरा रही है कि किसी भी बड़े फैसले से पहले सत्ता पक्ष विपक्ष को विश्वास में लेता है। उन्होंने सवाल उठाया कि मोदी सरकार का यह तीसरा कार्यकाल है, इसके बावजूद परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्ष से चर्चा क्यों नहीं की जा रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में पिछले विशेष संसदीय अधिवेशन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार से विधेयक को पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनावों के बाद लाने तथा व्यापक सहमति बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी।

गहलोत के अनुसार, उस समय भी सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाने के बजाय अलग-अलग राजनीतिक दलों से अलग-अलग चर्चा की। उन्होंने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पूरा देश चाहता है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष मिलकर ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर फैसला करें, तो सरकार सभी दलों को एक मंच पर लाने से क्यों बच रही है?

अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए भाजपा के कथित छिपे एजेंडे को लेकर भी प्रश्न किया। उन्होंने कहा कि देश जानना चाहता है कि सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर विपक्ष के साथ व्यापक चर्चा क्यों नहीं कर रही है।

गहलोत ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह सर्वदलीय बैठक बुलाए और सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेकर आगे का निर्णय करे। उनकी इस पोस्ट के जरिए परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाने तथा सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित