दुर्गापुरा में देश-विदेश के वैज्ञानिक करेंगे गेहूं-जौ अनुसंधान पर महामंथन

 


जयपुर, 17 अगस्त (हि.स.)। श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर की अधीनस्थ इकाई राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा में 18 से 20 अगस्त तक गेहूं एवं जौ अनुसंधान से संबंधित तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में देश-विदेश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों तथा गेहूं एवं जौ अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ भाग लेंगे।

बैठक में देश में गेहूं एवं जौ की उत्पादकता बढ़ाने, बदलती जलवायु के अनुरूप उन्नत किस्मों के विकास, रोग एवं कीट प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा आधुनिक कृषि तकनीकों पर व्यापक मंथन किया जाएगा।

वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए गए अनुसंधान कार्यों की प्रगति एवं उपलब्धियों को भी प्रस्तुत किया जाएगा।

विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन एवं बढ़ते तापमान की परिस्थितियों में गेहूं एवं जौ की फसलों को अधिक अनुकूल बनाने, कम अवधि एवं अधिक उत्पादक किस्मों के विकास तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए तकनीकी विकल्पों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही कृषि में डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिमोट सेंसिंग एवं प्रिसिजन एग्रीकल्चर के उपयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

बैठक के दौरान गेहूं एवं जौ अनुसंधान से जुड़ी विभिन्न अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं की उपलब्धियों की समीक्षा की जाएगी तथा आगामी अनुसंधान कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। वैज्ञानिकों के बीच नवीनतम अनुसंधान परिणामों एवं तकनीकों के आदान-प्रदान से देश में गेहूं एवं जौ उत्पादन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि राजस्थान में इस राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण वैज्ञानिक बैठक का आयोजन प्रदेश के कृषि वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। इससे गेहूं एवं जौ अनुसंधान में राजस्थान की भूमिका को मजबूती मिलने के साथ-साथ प्रदेश की कृषि परिस्थितियों के अनुरूप नवीन तकनीकों एवं अनुसंधान परिणामों को किसानों तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

तीन दिवसीय बैठक के दौरान देशभर से आए वैज्ञानिकों के बीच तकनीकी संवाद के साथ भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं पर व्यापक चर्चा होगी। बैठक के निष्कर्षों एवं सुझावों के आधार पर गेहूं एवं जौ की उत्पादकता, गुणवत्ता एवं जलवायु सहनशीलता बढ़ाने के लिए आगामी अनुसंधान कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश