छह दिन तक मनेगा दीपोत्सव: 8 नवंबर को स्वाति नक्षत्र में दीपावली

 


जयपुर, 03 नवंबर (हि.स.) । सनातन धर्मावलंबियों का प्रमुख पर्व दीपोत्सव इस बार छह दिनों तक मनाया जाएगा। तीन साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब अमावस्या तिथि दो दिन रहने के कारण दीपोत्सव पांच के बजाय छह दिन का होगा। धनतेरस से शुरू होने वाला उत्सव 11 नवंबर को भाई दूज तक चलेगा। इस दौरान धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, सोमवती अमावस्या, गोवर्धन पूजा और भाई दूज के पर्व परंपरागत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाए जाएंगे। आठ नवंबर रविवार को स्वाति नक्षत्र के साथ आयुष्मान और सौभाग्य योग के विशेष संयोग में दीपावली मनाई जाएगी।

6 नवंबर को धनतेरस से शुरुआत

कार्तिक कृष्ण पक्ष की प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी तिथि पर 6 नवंबर शुक्रवार को धनतेरस के साथ दीपोत्सव का शुभारंभ होगा। त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 11 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर शनिवार को सुबह 10 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। धनतेरस को धन, सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि का पर्व माना जाता है। इस दिन सोना-चांदी, आभूषण, रत्न, भूमि-भवन, वाहन, वस्त्र और बर्तनों की खरीदारी शुभ मानी जाती है।

घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर और मां सरस्वती का पूजन होगा। आरोग्यता, सुख-समृद्धि और धन-वैभव की कामना के साथ भगवान धन्वंतरि की आराधना की जाएगी। अकाल मृत्यु, रोग और शोक से मुक्ति की कामना करते हुए घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमराज के निमित्त तेल का दीपक जलाया जाएगा। गोधूलि बेला में पंचदेव के निमित्त पांच घी के दीपक जलाने की भी परंपरा है।

7 नवंबर को नरक चतुर्दशी और छोटी दीपावली

कार्तिक कृष्ण पक्ष की प्रदोष व्यापिनी चतुर्दशी तिथि पर 7 नवंबर शनिवार को नरक चतुर्दशी और छोटी दीपावली मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 55 मिनट से 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 2 मिनट तक रहेगी। इस दिन घरों में पांच, 11 या 21 दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि दीपदान से नकारात्मकता दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

स्वाति नक्षत्र में आयुष्मान और सौभाग्य योग

पंडित बनवारी लाल शर्मा के अनुसार दीपोत्सव का प्रमुख पर्व दीपावली 8 नवंबर रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की प्रदोष और निशीथ व्यापिनी अमावस्या के साथ स्वाति नक्षत्र, आयुष्मान और सौभाग्य योग का विशेष संयोग रहेगा। दीपावली पर स्थिर लग्न में माता महालक्ष्मी, महासरस्वती, भगवान गणेश और कुबेर का विधि-विधान से पूजन किया जाएगा। श्रद्धालु धन, वैभव, सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की कामना के साथ दीप प्रज्ज्वलित करेंगे।

शर्मा के अनुसार स्वाति 27 नक्षत्रों में 15वां नक्षत्र है और इसका स्वामी राहु है। इसे स्वतंत्रता, गतिशीलता और प्रगति का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता है कि इस नक्षत्र में किए गए शुभ कार्य विशेष फलदायी होते हैं। जिस प्रकार स्वाति नक्षत्र में वर्षा की बूंद सीप में गिरकर मोती बनने की मान्यता से जुड़ी है, उसी प्रकार इस नक्षत्र में किए गए कार्यों में सफलता और उन्नति की कामना की जाती है। आयुष्मान योग को दीर्घायु और आरोग्यता तथा सौभाग्य योग को सुख-समृद्धि और शुभ फल से जोड़कर देखा जाता है।

9 को सोमवती अमावस्या, 10 को गोवर्धन पूजा

दीपावली के अगले दिन 9 नवंबर सोमवार को अमावस्या तिथि रहने से सोमवती अमावस्या का संयोग बनेगा। इस दिन महिलाएं माता तुलसी की परिक्रमा करेंगी और धार्मिक अनुष्ठान करेंगी। इसके अगले दिन 10 नवंबर मंगलवार को विधि-विधान से गोवर्धन पूजा होगी। इसके साथ ही शहर के मंदिरों में अन्नकूट महोत्सव के आयोजन शुरू हो जाएंगे।

11 नवंबर को भाई दूज के साथ समापन

दीपोत्सव के छठे और अंतिम दिन 11 नवंबर बुधवार को भाई दूज मनाई जाएगी। इस दिन बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करेंगी। इसी के साथ छह दिवसीय दीपोत्सव का समापन होगा। पूरे शहर में दीपोत्सव की रौनक रहेगी। मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष सजावट, दीपदान और धार्मिक आयोजन होंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश