तिथियों के अद्भुत संयोग से छह दिन का होगा इस बार दीपोत्सव

 


जयपुर, 19 अक्टूबर (हि.स.)। पंचांग की गणना और तिथियों के विशेष संयोग के चलते इस बार दीपोत्सव पांच के बजाय छह दिनों तक मनाया जाएगा। 6 नवंबर को धनतेरस के साथ शुरू होने वाले दीपोत्सव का समापन 11 नवंबर को भाई दूज के साथ होगा। इस दौरान धनतेरस, रूप चतुर्दशी, दीपावली, रामा-श्यामा अमावस्या, गोवर्धन पूजा और भाई दूज सहित विभिन्न पर्व मनाए जाएंगे। तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण पर्वों की तारीखों और पूजा के शुभ मुहूर्त को लेकर विशेष चर्चा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पंचांग की गणना के आधार पर प्रत्येक पर्व का अलग-अलग धार्मिक महत्व रहेगा।

धनतेरस से होगी पर्वों की शुरुआत

दीपोत्सव की शुरुआत 6 नवंबर को धनतेरस से होगी। त्रयोदशी तिथि, हस्त नक्षत्र और शुक्र प्रदोष के संयोग में सोना-चांदी, वाहन और बर्तन खरीदना शुभ माना गया है। इसके अगले दिन 7 नवंबर को रूप चतुर्दशी मनाई जाएगी। इस दिन हनुमानजी की पूजा और संकट निवारण से जुड़े अनुष्ठान किए जाएंगे।

8 नवंबर को दीपावली का मुख्य पर्व मनाया जाएगा। अमावस्या तिथि के साथ प्रदोष काल और वृषभ स्थिर लग्न का संयोग लक्ष्मी पूजन के लिए विशेष माना गया है। इसके बाद 9 नवंबर को रामा-श्यामा अमावस्या का पर्व रहेगा। इस दिन दोपहर 12:32 बजे तक अमावस्या तिथि रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवसर पर देव कार्य, बलिराज पूजा तथा प्रतिष्ठानों में विशेष हवन और लक्ष्मी पूजन किया जा सकेगा।

गोवर्धन पूजा 10 को, भाई दूज से समापन

10 नवंबर को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा। उदया तिथि और प्रतिपदा के संयोग के चलते शास्त्रों के अनुसार इसी दिन मुख्य गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का आयोजन होगा। वहीं, 11 नवंबर को द्वितीया तिथि और अनुराधा नक्षत्र के संयोग में भाई दूज मनाई जाएगी। इस दिन भाई-बहन के स्नेह और प्रेम का पर्व मनाने के साथ चित्रगुप्त पूजन भी किया जाएगा। इसके साथ ही छह दिवसीय दीपोत्सव का समापन होगा।

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष मुहूर्त

पंडित राजेश कुमार शर्मा के अनुसार 8 नवंबर को दीपावली पर शाम 5:54 से 7:50 बजे तक लक्ष्मी पूजन का विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा। इस दौरान वृषभ स्थिर लग्न और प्रदोष काल का संयोग रहेगा। प्रदोष काल शाम 6:02 से रात 8:34 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में विधि-विधान से लक्ष्मी पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है।

वहीं रात्रि में तंत्र साधना करने वालों के लिए निशीथ काल का मुहूर्त रात 11:39 से 12:31 बजे तक रहेगा। इस प्रकार पंचांग में तिथियों के विशेष संयोग के चलते इस बार दीपोत्सव छह दिनों तक धार्मिक आस्था, पूजा-अर्चना और परंपराओं के साथ मनाया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश