दो दिन के मासूम को लेकर खुशी-खुशी घर लौट रहा था परिवार, रास्ते में मौत ने छीन ली तीन जिंदगियां

 


बाड़मेर, 13 अक्टूबर (हि.स.)। दो दिन पहले जिस घर में नन्हे मेहमान के आने से खुशियां छाई थीं, वहां मंगलवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने मातम पसरा दिया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अपने दो दिन के नवजात बेटे को लेकर खुशी-खुशी घर लौट रहे दंपती की कार सामने से आ रहे ट्रैक्टर से टकरा गई। हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए और पति-पत्नी सहित उनके दो दिन के मासूम बेटे की मौत हो गई। दुर्घटना में कार चालक सहित तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा मंगलवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे जिले के रामसर थाना क्षेत्र में हाथमा गांव के पास हुआ।

रामसर थानाधिकारी विक्रमदान चारण के अनुसार, हादसे में बालेवा निवासी हिंगलाजराम पुत्र लीलाराम, उनकी पत्नी तुलसी और उनके दो दिन के नवजात बेटे की मौत हो गई। कार में सवार चालक महावीरदान पुत्र सुमेरदान तथा हिंगलाजराम की दो बहनें गुड्डी पत्नी पूराराम निवासी तुड़बी और शायरी पत्नी देवाराम निवासी मोड़ा गंभीर रूप से घायल हो गईं। घायलों को उपचार के लिए बाड़मेर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

तुलसी ने दो दिन पहले बाड़मेर जिला अस्पताल में बेटे को जन्म दिया था। परिवार में नए सदस्य के आगमन से खुशी का माहौल था। मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद हिंगलाजराम अपनी पत्नी, नवजात बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ स्विफ्ट कार से अपने गांव बालेवा लौट रहे थे।

कार महावीरदान चला रहा था। इसी दौरान हाथमा गांव के पास सामने से आ रहे ट्रैक्टर से कार की जोरदार भिड़ंत हो गई।

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह पिचक गया और उसमें सवार लोग अंदर ही फंस गए। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी और घायलों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। कार के दरवाजे तोड़कर उसमें फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। इसके बाद निजी वाहनों और 108 एम्बुलेंस की मदद से घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

हादसे के प्रत्यक्षदर्शी लोको पायलट अचलाराम ने बताया कि वह छुट्टी पर अपने घर जा रहे थे।

उनका परिवार दूसरी गाड़ी में आगे चल रहा था। हाथमा गांव के पास पहुंचने पर सड़क पर भीड़ दिखाई दी। वहां ट्रैक्टर सड़क पर खड़ा था और दुर्घटनाग्रस्त स्विफ्ट कार गड्ढे में पड़ी थी। कार से लोगों के चिल्लाने की आवाज आ रही थी, लेकिन मौके पर मौजूद कई लोग घायलों की मदद करने के बजाय वीडियो और तस्वीरें बना रहे थे।

अचलाराम के अनुसार, उन्होंने बांकाराम और धर्माराम के साथ मिलकर घायलों को बचाने का प्रयास किया। बांकाराम ने कार का दरवाजा तोड़ा और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला।

सबसे पहले चालक को बाहर निकाला गया। इसके बाद अन्य घायलों को निकालकर अस्पताल भिजवाया गया। अचलाराम ने घटना के दौरान लोगों के मदद के लिए आगे नहीं आने पर दुख जताया।

प्रत्यक्षदर्शी अचलाराम ने बताया कि कार में छह लोग सवार थे, जिनमें दो दिन का नवजात भी शामिल था। मासूम की हालत देखकर मौके पर मौजूद लोगों का दिल दहल गया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद सबसे जरूरी काम घायलों की जान बचाना था, लेकिन कई लोग मदद करने के बजाय मोबाइल से वीडियो बनाने में व्यस्त थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित