डांगावास हत्याकांड: पीयूसीएल ने हाईकोर्ट में अपील की तैयारी की, पीड़ित परिवार से मिलकर जताई निराशा
नागौर, 10 अगस्त (हि.स.)। डांगावास हत्याकांड मामले में आए फैसले के बाद पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा। इस दौरान संगठन ने मामले को राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में चुनौती देने की बात कही और पीड़ित पक्ष को आगे की कानूनी लड़ाई में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया।
पीयूसीएल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव, राष्ट्रीय सचिव भंवर मेघवंशी, प्रदेश कोषाध्यक्ष राकेश शर्मा और दलित राइट्स एक्टिविस्ट एडवोकेट ताराचंद वर्मा सहित प्रतिनिधिमंडल ने रामदेव मंदिर में ग्रामीणों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों, विशेषकर महिलाओं से मुलाकात कर उनकी पीड़ा सुनी।
पीयूसीएल पदाधिकारियों ने कहा कि अदालत द्वारा 40 लोगों को दोषमुक्त कर देना इस बात का प्रमाण नहीं है कि घटना हुई ही नहीं। उन्होंने कहा कि अदालत ने भी घटना में हुई मौतों और घायलों को स्वीकार किया है, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि डांगावास की न्याय यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है और न्याय के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
पीयूसीएल ने आरोप लगाया कि समय के साथ सरकार अपने वादों से पीछे हट गई, जिसके कारण पीड़ित परिवारों को लंबे समय तक न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ा। संगठन के अनुसार, फैसले के बाद भी पीड़ित परिवारों में निराशा का माहौल है और उनका कहना है कि इतने लंबे इंतजार के बावजूद उन्हें पूर्ण न्याय नहीं मिल सका।
पीयूसीएल ने कहा कि पांच अगस्त के फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में चुनौती देने की प्रक्रिया में संगठन पीड़ित पक्ष के साथ खड़ा रहेगा।
साथ ही, कानूनी और सामाजिक स्तर पर हरसंभव सहयोग जारी रखने का आश्वासन दिया गया। इस बीच पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा भी पीड़ित परिवार से मिलने डांगावास पहुंचे और उनकी स्थिति की जानकारी ली। 14 मई 2015 को जमीन विवाद को लेकर रतनाराम मेघवाल, पोखरराम मेघवाल, पांचाराम मेघवाल, खेमाराम मेघवाल, गणपतराम मेघवाल और दूसरे पक्ष के रामपाल गोसाईं की हत्या हुई थी। इनमें से तीन लोगों की हत्या ट्रैक्टर से कुचलकर की गई थी। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।
आरोप था कि जमीन को लेकर विवाद के चलते झोपड़ी बनाकर कब्जे की कोशिश की गई, जिसके बाद हिंसा भड़क गई।
बचाव पक्ष का कहना है कि 40 आरोपियों को गलत तरीके से फंसाया गया और वे घटना में शामिल नहीं थे। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 82 गवाह और बचाव पक्ष की ओर से 8 गवाह पेश किए गए थे।
वर्ष 2019 में राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए ट्रायल तीन महीने के लिए रोक दिया था, जिसके बाद सभी 40 आरोपी गिरफ्तार किए गए थे।
पीयूसीएल ने कहा है कि यह मामला अब भी न्यायिक प्रक्रिया में है और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित