‘एड्रेस अपडेट’ के नाम पर की जा रही है साइबर ठगी: पार्सल होल्ड का मैसेज भेज खाली कर रहे खाते
जयपुर, 01 अक्टूबर (हि.स.)। इंडिया पोस्ट, स्पीड पोस्ट और प्रमुख कूरियर कंपनियों के नाम पर साइबर ठगों ने लोगों को ठगने का नया तरीका अपनाया है। ठग एसएमएस, व्हाट्सऐप, ई-मेल और फोन कॉल के जरिए मैसेज भेजकर दावा कर रहे हैं कि गलत पते के कारण पार्सल रोक दिया गया है। पार्सल वापस लौटने से बचाने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक कर तत्काल एड्रेस अपडेट करने का झांसा दिया जा रहा है। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा (R4C) ने इस नए साइबर अपराध को लेकर आमजन के लिए विशेष एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने की अपील की है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि ठग इंडिया पोस्ट, स्पीड पोस्ट या नामी कूरियर एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। संदेशों में सरकारी दस्तावेज या कीमती सामान वाला पार्सल रोकने की बात कही जाती है और जल्द कार्रवाई नहीं करने पर पार्सल वापस भेजने का डर दिखाया जाता है।
साइबर ठग मैसेज के साथ असली जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट का लिंक या खतरनाक एपीके फाइल भेजते हैं। लिंक पर क्लिक करने और एपीके डाउनलोड करने पर मोबाइल में खतरनाक ऐप इंस्टॉल हो सकता है। इससे फोन में मौजूद संवेदनशील जानकारी तक ठगों की पहुंच बनने का खतरा रहता है।
इसके बाद एड्रेस सुधार के नाम पर 10, 25 या 50 रुपए जैसे मामूली शुल्क का भुगतान करने को कहा जाता है। भुगतान के दौरान पीड़ित से डेबिट-क्रेडिट कार्ड की जानकारी, नेट बैंकिंग पासवर्ड या यूपीआई पिन दर्ज करवाया जाता है। इसके बाद साइबर अपराधी खाते से बड़ी रकम निकाल सकते हैं।
आधिकारिक वेबसाइट से ही करें ट्रैकिंग: स्पीड पोस्ट या कूरियर की जानकारी के लिए हमेशा संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट का इस्तेमाल करें। इंडिया पोस्ट की सेवाओं के लिए indiapost.gov.in का उपयोग करें।
यूआरएल जरूर जांचें: सरकारी वेबसाइटों में सामान्यतः .gov.in या .nic.in डोमेन होता है। किसी संदिग्ध लिंक में .com, .org या अन्य अनजान डोमेन होने पर उस पर क्लिक न करें।
कस्टमर केयर पर सीधे संपर्क करें: संदेह होने पर केवल इंडिया पोस्ट के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर 1800-266-6868 पर संपर्क करें।
कॉल फॉरवर्डिंग भी जांचें: समय-समय पर मोबाइल में कॉल फॉरवर्डिंग की स्थिति जांचते रहें। अनजान नंबरों से आने वाले संदिग्ध संदेशों को ब्लॉक करें।
राजस्थान पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बैंक खाता संख्या, कार्ड डिटेल, सीवीवी, एटीएम पिन या ओटीपी जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करें। एड्रेस अपडेट के नाम पर आए किसी संदिग्ध लिंक के जरिए 10-20 रुपए या कोई अन्य राशि का भुगतान भी नहीं करें।
अनजान व्यक्ति के कहने पर एनीडेस्क, टीमव्यूअर जैसे स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप भी मोबाइल में इंस्टॉल नहीं करें। ऐसे ऐप का दुरुपयोग मोबाइल और उसमें मौजूद जानकारी तक पहुंच बनाने के लिए किया जा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश