विश्वविद्यालयों में आंतरिक मूल्यांकन में 'क्रेडेंशियल इन्फ्लेशन' रोकने के हों प्रयास : कुलगुरु
अजमेर, 6 अक्टूबर(हि.सं.)। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (एमडीएसयू) के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि राज्य-वित्तपोषित संबद्धता प्रदान करने वाले विश्वविद्यालयों में आंतरिक मूल्यांकन में शैक्षणिक गंभीरता और समानता सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जाए।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव कुलदीप रांका को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अंतर्गत आंतरिक मूल्यांकन का उद्देश्य विद्यार्थी की सतत शैक्षणिक सहभागिता का आकलन करना है। इसमें कक्षा में भागीदारी, असाइनमेंट, परियोजनाएं, आवधिक परीक्षाएं और प्रायोगिक कार्य शामिल हैं।
प्रो. अग्रवाल ने बताया कि स्वयंपाठी (नॉन-कॉलेजिएट) विद्यार्थी नियमित कक्षा-शिक्षण से नहीं गुजरते, फिर भी उन्हें सत्रांत परीक्षा में प्राप्त अंकों के अनुपात में आंतरिक अंक दे दिए जाते हैं। उदाहरण के लिए, सत्रांत परीक्षा में 70 में से 49 अंक पाने वाले विद्यार्थी को सतत एवं व्यापक मूल्यांकन में स्वतः 30 में से 21 अंक मिल जाते हैं। इस प्रकार वह आवधिक परीक्षा, उपस्थिति या परियोजना कार्य के बिना ही 100 में से 70 अंक प्राप्त कर लेता है। इससे आंतरिक मूल्यांकन का उद्देश्य कमजोर पड़ता है और 'क्रेडेंशियल इन्फ्लेशन' को बढ़ावा मिलता है।
कुलगुरु ने नौ सूत्रीय सुझाव दिए हैं। इनमें आंतरिक अंकों को पहचान योग्य शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ना, असंस्थागत विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था, सभी राज्य विश्वविद्यालयों में एकसमान न्यूनतम मानक और मूल्यांकन के दस्तावेजी प्रमाण रखना शामिल है। उन्होंने प्रत्येक केंद्र पर परीक्षा प्रकोष्ठ के माध्यम से आवधिक शैक्षणिक अंकेक्षण (ऑडिट), पारदर्शिता के लिए डिजिटल रिकॉर्ड तथा राजकीय संबद्ध महाविद्यालयों को व्यवस्था गंभीरता से लागू करने के निर्देश देने का भी सुझाव दिया है।
पत्र में कहा गया है कि प्रत्येक अंक का शैक्षणिक अर्थ होना चाहिए। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि उद्देश्य विद्यार्थियों के अंक या अवसर कम करना नहीं है। पत्र के अनुसार डिग्री ज्ञान, योग्यता और अधिगम का सार्वजनिक प्रमाण है। इस संदर्भ मे कुलगुरु ने राज्य विश्वविद्यालयों और उनके संबद्ध महाविद्यालयों में आंतरिक मूल्यांकन की मौजूदा पद्धतियों की राज्य स्तर पर समीक्षा करने का भी सुझाव दिया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष