श्री अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर के अध्यक्ष सहित प्रबंध कार्यकारिणी हुई पावरलेस
अजमेर, 28 मई(हि.स.)। श्री अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर के आगामी चुनाव को लेकर जिला न्यायाधीश विक्रात गुप्ता की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला जारी करते हुए आगामी सुनवाई की 01 जुलाई 2026 नियत की है। अदालत के आदेश के पश्चात माहेश्वरी समाज के सबसे प्रतिष्ठित सदनों में से एक पुष्कर सदन के चुनाव सुचारू रूप से व नियमों के तहत सम्पन्न होने की ना केवल राह साफ हो गयी है बल्कि अध्यक्ष सहित प्रबंध कार्यकारिणी चुनाव तक कोई नीतिगत फैसला नहीं ले सकेगी और चुनाव तक सदन के नीतिगत कामकाज पर रोक रहेगी।
प्रकरण में मार्गदर्शक मण्डल की ओर से पैरवी पूर्व लोक अभियोजक विवेक पाराशर, राजेश ईणानी एवं राहुल सोमानी व अन्य की ओर से पैरवी हर्षित मित्तल एडवोकेट ने की।
एडवोकेट विवेक पाराशर ने बताया कि श्री अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर के विचाराधीन प्रकरण राहुल सोमानी, मार्गदर्शक मण्डल के रामपाल सोनी व अन्य बनाम राधामोहन सोनी के मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि श्री माहेश्वरी सेवा सदन संस्था के चुनाव विधान के अनुसार ही संचालित होंगे।
न्यायालय द्वारा पारित आदेश में स्पष्ट रूप से संस्था के विधान नियम 7-घ(1) का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रबंध कार्यकारिणी समिति अपना कार्यकाल समाप्त होने से 60 दिवस पूर्व चुनाव अधिकारी नियुक्त करेगी और अध्यक्ष, महामंत्री की सलाह से चुनाव अधिकारी, चुनाव तिथि तय करेंगे ऐसा नहीं होने की स्थिति मे मार्गदर्शक मण्डल को यह अधिकार रहेगा कि वे चुनाव प्रक्रिया प्रांरभ करवाकर समय सीमा में चुनाव करावे।
ज्ञातव्य रहे कि अध्यक्ष व प्रबंध कार्यकारिणी का कार्यकाल 15 दिसम्बर 25 को ही समाप्त हो चुका है बावजूद इसके चुनाव नहीं होने के कारण संस्था के मार्गदर्शक मण्डल व समाज के जागरूक सदस्यों द्वारा चुनाव कराने का लेकर अदालत की शरण ली गयी। अदालत में मार्गदर्शक मण्डल द्वारा स्पष्ट रूप से बताया गया कि उनके द्वारा 12 दिसम्बर 2025 को श्री किशन गोपाल दरगड को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया जा चुका है। अदालत द्वारा सुनवाई के पश्चात स्पष्ट निर्देश जारी किये हैं कि सभी पक्ष दौरान चुनाव प्रक्रिया को बिना किसी बाधा के नियमों के अनुसार आगे जारी रख सकते हैं साथ ही न्यायालय द्वारा ये भी स्पष्ट किया गया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान न्यायालय की अनुमति के बिना किसी प्रकार का कोई नीतिगत फैसला नहीं लिया जायेगा और यदि कोई नीतिगत फैसला लिया जाना आवश्यक हो तो उसके लिए न्यायालय की पूर्वानुमति आवश्यक होगी।
न्यायालय द्वारा नियुक्त चुनाव अधिकारी को आदेश दिये हैं कि वे चुनाव की तिथि से न्यायालय को अवगत कराये साथ ही 01 जुलाई 2026 को आगामी सुनवाई तक चुनाव के संबंध में उनके द्वारा जो कार्यवाही की गयी है उससे अवगत कराते हुए अदालत में शपथ पत्र प्रस्तुत करें। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस दौरान की जाने वाली सभी अग्रिम कार्यवाहियां न्यायालय के अंतिम आदेश के अत्यधीन होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष