शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर कांग्रेस का बड़ा आरोप, डोटासरा बोले—राजस्थान में चल रहा है तबादला उद्योग
जयपुर, 13 जनवरी (हि.स.)। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर किए गए तबादलों को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंगलवार को जयपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में डोटासरा ने कहा कि राजस्थान में तबादलों के नाम पर खुलेआम भ्रष्टाचार हो रहा है और सरकार ने शिक्षा विभाग को “तबादला उद्योग” बना दिया है।
डोटासरा ने कहा कि एक माह बाद छात्रों की मुख्य परीक्षाएं हैं और वर्तमान में प्रायोगिक परीक्षाएं चल रही हैं, इसके बावजूद सरकार ने बड़े पैमाने पर तबादले कर दिए। उन्होंने बताया कि सितंबर 2025 में 7 हजार से अधिक प्रधानाचार्यों के तबादले किए गए थे। उप-प्रधानाचार्य से पदोन्नत होकर प्रधानाचार्य बने अधिकारी आठ माह तक काउंसलिंग के अभाव में पदस्थापन के इंतजार में बैठे रहे। कई स्कूलों में एक ही स्थान पर तीन-तीन और चार-चार प्रधानाचार्य पदस्थापित हो गए।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के स्पष्ट आदेशों के बावजूद, जिनमें एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) कार्य में लगे कार्मिकों के बिना अनुमति तबादले पर रोक है, सरकार ने साढ़े छह हजार से अधिक व्याख्याताओं के तबादले कर दिए। इनमें से लगभग 30 से 35 प्रतिशत व्याख्याता एसआईआर के कार्य में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस तबादला सूची को चुनाव आयोग से अनुमोदित नहीं करवाया गया, जिससे यह पूरी सूची गैरकानूनी है।
उन्होंने बताया कि तबादला सूची के विरोध के बाद सरकार ने आनन-फानन में नया आदेश जारी कर एसआईआर कार्य में लगे कार्मिकों को रिलीव नहीं करने और यदि किसी ने जॉइन कर लिया है तो उसे वापस भेजने के निर्देश दिए। इससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। कई स्थानों पर एक ही पद पर दो कार्मिक कार्य करेंगे, जबकि कई स्कूलों में पद खाली रह जाएंगे, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी।
डोटासरा ने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है कि प्रायोगिक परीक्षाओं के दौरान एक-एक व्याख्याता को 10–12 स्कूलों का प्रभार दिया गया है। विशेषकर विज्ञान विषय के व्याख्याता दो माह तक अलग-अलग स्कूलों में प्रायोगिक परीक्षाएं करवाने को मजबूर हैं। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि तबादला आदेशों के बाद प्रायोगिक परीक्षाएं कौन करवाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि तबादलों में मंत्री स्तर से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक भ्रष्टाचार हुआ है और मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठे आरएसएस से जुड़े लोग भी इसमें लिप्त हैं। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में राजनीतिक विद्वेष के चलते 85 से 100 प्रतिशत तक तबादले “प्रशासनिक कारण” बताकर किए गए हैं। लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां सितंबर 2025 में 87.67 प्रतिशत प्रधानाचार्यों के और वर्तमान में 85 प्रतिशत व्याख्याताओं के तबादले प्रशासनिक आधार पर किए गए।
डोटासरा ने मुख्यमंत्री से मांग की कि यदि सरकार छात्रों के भविष्य के प्रति संवेदनशील है तो वर्तमान तबादला सूची को तुरंत निरस्त किया जाए और तबादले सत्र समाप्ति के बाद या सत्र प्रारंभ में ही किए जाएं। उन्होंने कहा कि इन तबादलों से न केवल कर्मचारी परेशान हैं, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है।
सरकारी भर्तियों को लेकर भी डोटासरा ने सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार भर्तियों का वादा दोहरा रहे हैं, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया जा रहा। जारी भर्ती कैलेंडर में अधिकांश भर्तियों में पदों की संख्या 1000 से कम है। सफाई कर्मचारियों की भर्ती का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह भर्ती पहले भी भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण निरस्त की जा चुकी है और अब उसी भर्ती को फिर से विज्ञापन में दिखाया जा रहा है।
डोटासरा ने दोहराया कि प्रायोगिक परीक्षाओं के बीच और मुख्य परीक्षाओं से ठीक पहले जारी तबादला सूची को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित