तीन बंदरों के साथ कांग्रेस नेता का अनूठा प्रदर्शन, बोले- ‘न दिखाई देता है, न सुनाई देता है’

 




भीलवाड़ा, 02 अक्टूबर (हि.स.)। गांधी जयंती के मौके पर भीलवाड़ा में कांग्रेस के भीतर चल रहा 17 चुनावी सिंबल का विवाद एक बार फिर सड़क पर दिखाई दिया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य मनोज पालीवाल ने शुक्रवार को अनूठे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। पालीवाल तीन युवकों को महात्मा गांधी के तीन बंदरों के प्रतीक के रूप में साथ लेकर पैदल मार्च पर निकले। हाथ में लाठी और साथ में तीन बंदरों का प्रतीकात्मक प्रदर्शन लेकर वे भोपाल क्लब के बाहर स्थित गांधी प्रतिमा से जिला कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचे।

गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद शुरू हुई इस पैदल यात्रा का मकसद कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ अपनी नाराजगी दर्ज कराना था। पालीवाल का कहना है कि भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों को पार्टी का अधिकृत चुनाव चिह्न नहीं मिल पाने के मामले में करीब एक माह से वह प्रदेश नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं, लेकिन अब तक जिम्मेदारी तय नहीं हुई।

पालीवाल ने विरोध के लिए गांधीजी के प्रसिद्ध तीन बंदरों को प्रतीक बनाया। उनका कहना था कि “बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो” वाले तीन बंदर आज प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की स्थिति को दर्शाते हैं। उनके अनुसार वह लगातार अपनी बात उठाते आ रहे हैं, लेकिन नेतृत्व उनकी शिकायत पर न तो ध्यान दे रहा है और न ही मामले में कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि गांधी जयंती उनके लिए केवल श्रद्धांजलि का दिन नहीं, बल्कि सत्य और अपनी बात अहिंसक तरीके से रखने का अवसर भी है। इसी सोच के साथ गांधी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने के बाद उन्होंने पैदल यात्रा निकाली।

पालीवाल का मुख्य आरोप भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों के अधिकृत सिंबल संबंधी दस्तावेज समय पर निर्वाचन अधिकारी तक नहीं पहुंचने को लेकर है। जानकारी के अनुसार भीलवाड़ा नगर निगम के 70 वार्डों में कांग्रेस के 53 प्रत्याशियों के अधिकृत दस्तावेज पहुंचे थे, जबकि 17 प्रत्याशियों के सिंबल समय सीमा में जमा नहीं हो सके। इस घटनाक्रम के बाद मामला पार्टी के भीतर विवाद का विषय बना और पालीवाल ने प्रदेश नेतृत्व से जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई।

पालीवाल का आरोप है कि इस चूक के कारण 17 प्रत्याशी कांग्रेस के अधिकृत चुनाव चिह्न पर चुनाव नहीं लड़ सके। उनका कहना है कि मामले में समय रहते जिम्मेदारी तय होती और कार्रवाई की जाती तो कार्यकर्ताओं के बीच भी स्पष्ट संदेश जाता।

पालीवाल ने आरोप लगाया कि सिंबल विवाद का असर केवल पार्षद पद के प्रत्याशियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कांग्रेस महापौर और उपमहापौर पद के लिए भी अपने प्रत्याशी मैदान में नहीं उतार सकी। उन्होंने इसे संगठन के लिए गंभीर स्थिति बताते हुए प्रदेश नेतृत्व से जवाबदेही तय करने की मांग की है। इस पूरे प्रकरण में पालीवाल ने कांग्रेस के कुछ स्थानीय पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने सिंबल पहुंचाने की जिम्मेदारी से जुड़े लोगों पर लापरवाही के आरोप लगाए। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष किसी स्वतंत्र जांच या संबंधित संगठनात्मक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी पालीवाल की ओर से जांच और कार्रवाई की मांग दर्ज है।

पार्टी में अनुशासनहीनता के सवाल पर पालीवाल ने कहा कि उन्होंने किसी तरह की अनुशासनहीनता नहीं की है। उनके अनुसार कांग्रेस में कार्यकर्ताओं को अपनी बात रखने का अधिकार है और उन्होंने भी संगठन के भीतर अपनी शिकायत रखने का प्रयास किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद