कतरियासर की पावन धरा पर पेड़ों की कटाई और हिरणों के जीवन पर संकट : भारत तिब्बत सहयोग मंच ने जतायी चिंता

 




बीकानेर, 06 नवंबर (हि.स.)। जिले के प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक धाम कतरियासर में जल ग्रहण योजना के अंतर्गत चल रहे प्रोजेक्ट को लेकर पेड़ों की कथित कटाई और वन्यजीवों, विशेषकर हिरणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले को लेकर भारत तिब्बत सहयोग मंच के जिला अध्यक्ष मुकेश बन ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन एवं संबंधित विभागों से तत्काल हस्तक्षेप कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

मुकेश बन ने कहा कि कतरियासर केवल एक गांव या सामान्य स्थान नहीं है, बल्कि यह गुरु जसनाथ जी महाराज एवं माता काल्लदे की पावन अवतार भूमि के रूप में विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखता है। इस क्षेत्र की पहचान यहां की धार्मिक परंपराओं, प्राकृतिक वातावरण और वन्यजीवों से भी जुड़ी हुई है। ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में यदि विकास कार्यों के नाम पर पेड़ों की कटाई हो रही है और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंच रहा है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है।

उन्होंने कहा कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन विकास के नाम पर पर्यावरण, प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा की अनदेखी किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। किसी भी सरकारी योजना का उद्देश्य जनहित होना चाहिए। योजना के क्रियान्वयन में पर्यावरण संरक्षण एवं वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

भारत तिब्बत सहयोग मंच के जिला संयोजक (प्रगति प्रकोष्ठ) रामकिशन सिद्ध ने इस मामले में आरोप लगाया है कि जल ग्रहण योजना के अंतर्गत चल रहे कार्य में ठेकेदार पप्पू राम एवं विकास कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा खुलेआम पेड़ों की कटाई की जा रही है। उनका आरोप है कि ठेकेदार ग्रामीणों को यह कहकर जवाब दे रहा है कि उसे पेड़ काटने का ठेका दिया गया है तथा संबंधित अधिकारियों की ओर से लिखित अनुमति प्राप्त है।

इस पूरे मामले को लेकर भारत तिब्बत सहयोग मंच के जिला संयोजक (प्रगति प्रकोष्ठ) रामकिशन सिद्ध ने जामसर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच करने तथा पेड़ों की कटाई, कथित धमकियों और संबंधित अनुमति दस्तावेजों की जांच करने की मांग की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव