अलवर-भरतपुर में पायलट आधार पर शुरू होगा समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम
जयपुर, 30 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान में जन्म से तीन वर्ष तक के बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और उनके स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। भारत सरकार की पहल के तहत यह कार्यक्रम शुरुआती चरण में अलवर और भरतपुर जिलों में पायलट आधार पर लागू किया जाएगा।
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि कार्यक्रम के तहत जन्म से तीन वर्ष तक के सभी बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और विकास की नियमित निगरानी की जाएगी। खासतौर पर ऐसे बच्चों की समय रहते पहचान की जाएगी, जिन्हें सामान्य बच्चों की तुलना में अतिरिक्त देखभाल या उपचार की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के तहत बच्चों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर सामान्य और जोखिम वाली श्रेणी में चिन्हित किया जाएगा। जोखिम वाले बच्चों का घर पर नियमित फॉलोअप किया जाएगा। आवश्यकता होने पर उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा बड़े अस्पताल में उपचार के लिए रेफर किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर होने से पहले ही समस्या की पहचान कर समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। इससे पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
बच्चों की जांच और स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी के लिए आशा कार्यकर्ताओं को ‘शैशव ऐप’ की सुविधा दी जाएगी। आशा कार्यकर्ता ऐप पर बच्चों से संबंधित जानकारी दर्ज करेंगी, जिससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस बच्चे को विशेष देखभाल या उपचार की जरूरत है।
अस्पताल में रेफर किए गए बच्चों के उपचार के बाद उनका फॉलोअप भी ऐप के माध्यम से किया जा सकेगा। आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को समय पर सूचना और अलर्ट भी मिल सकेंगे।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की ओर से महाराष्ट्र में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कार्यक्रम की पायलट कार्ययोजना, मूल्यांकन तथा केंद्र, राज्य एवं सहयोगी संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा की गई।
राजस्थान की ओर से परियोजना निदेशक, बाल स्वास्थ्य डॉ. प्रदीप चौधरी ने पायलट इम्प्लीमेंटेशन प्लान और पार्टनर्स एंगेजमेंट से संबंधित पैनल चर्चा में भाग लिया तथा राजस्थान का प्रस्तुतीकरण दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित