कर्मचारी हितों पर सरकार का बड़ा फैसला: पदोन्नति में 2 साल की अनुभव छूट, सचिवालय में 149 नए पद सृजित

 


जयपुर, 12 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जनसेवा के प्रति समर्पित अधिकारी और कर्मचारी सुशासन की मजबूत नींव हैं। राज्य सरकार कर्मचारी कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पदोन्नति प्रक्रिया को सरल बनाने, प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने और कर्मचारियों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लागू कर रही है।

रविवार को राजस्थान सचिवालय सेवा अधिकारी संघ एवं राजस्थान सचिवालय कर्मचारी संघ की ओर से आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25, 2025-26 और 2026-27 के लिए पदोन्नति हेतु निर्धारित अनुभव में दो वर्ष की छूट देने का निर्णय लिया है। इसका लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा, जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में इस प्रकार की छूट का लाभ नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न सेवा नियमों में आवश्यक संशोधन के बाद इस निर्णय से हजारों कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सचिवालय प्रदेश की आठ करोड़ जनता की अपेक्षाओं और विश्वास का केंद्र है। प्रत्येक फाइल के पीछे किसी नागरिक की उम्मीद, किसान का भरोसा, युवा का भविष्य और परिवार की अपेक्षाएं जुड़ी होती हैं। ऐसे में प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी का दायित्व है कि वह पारदर्शिता, संवेदनशीलता और समयबद्धता के साथ कार्य करते हुए सुशासन को मजबूत बनाए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों के हित में कई अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए हैं। केंद्र सरकार की तर्ज पर ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है। 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को नोशनल वेतन वृद्धि के आधार पर पेंशन का लाभ, 70 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पेंशनरों को पांच प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन भत्ता तथा कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में 10 वर्ष तक बढ़ी हुई पारिवारिक पेंशन देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत कर्मचारियों को माता-पिता अथवा सास-ससुर में से किसी एक पक्ष को योजना में शामिल करने का विकल्प भी दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वेतनमान से जुड़े विषयों के अध्ययन के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी, जो आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का भी परीक्षण करेगी। उन्होंने कहा कि सेवा अवधि में स्थायी अक्षमता होने पर आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति, पद छोड़ने की स्थिति में प्रतीक्षा सूची से रिक्त पद भरने तथा महिला सशक्तीकरण के तहत पुत्रवधू को भी अनुकंपा नियुक्ति के दायरे में शामिल करने जैसे निर्णय लिए गए हैं। एकल महिला कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव को तीन के बजाय छह चरणों में स्वीकृत करने तथा कार्यस्थलों पर 'मुख्यमंत्री शिशु-वात्सल्य सदन' स्थापित करने की भी घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि सचिवालय की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए 15 सहायक शासन सचिव, 67 सहायक अनुभाग अधिकारी तथा 67 लिपिक ग्रेड प्रथम सहित कुल 149 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। इससे सचिवालय की कार्यक्षमता बढ़ेगी, विभागीय पदोन्नति के अवसर उपलब्ध होंगे और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों से नई तकनीक, ई-गवर्नेंस और पेपरलेस कार्यप्रणाली को अपनाते हुए मिशन कर्मयोगी की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से राजस्थान को सुशासन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित किया जा सकता है।

इस अवसर पर राजस्थान सचिवालय सेवा अधिकारी संघ के अध्यक्ष अभिमन्यु शर्मा, राजस्थान सचिवालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कजोड़मल मीणा सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित