सावधान! बंद बैंक खाते बन सकते हैं साइबर ठगी का जरिया
जयपुर, 12 जून (हि.स.)। राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने विशेष एडवाइजरी जारी की है। पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम एवं तकनीकी सेवाएं) कार्यालय ने चेतावनी दी है कि वर्षों से बंद, निष्क्रिय (इनएक्टिव) अथवा अनुपयोगी पड़े बैंक खाते साइबर अपराधियों के लिए आसान निशाना बनते जा रहे हैं। ठग ऐसे खातों का उपयोग ठगी से प्राप्त धनराशि को छिपाने, विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने तथा पुलिस जांच से बचने के लिए ‘मनी म्यूल अकाउंट’ के रूप में कर रहे हैं।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक साइबर क्राइम वीके सिंह के अनुसार साइबर अपराधी मुख्य रूप से सोशल इंजीनियरिंग, विशिंग (फोन कॉल के जरिए ठगी) और फिशिंग लिंक के माध्यम से लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। ठग स्वयं को बैंक अधिकारी बताकर कॉल करते हैं और खाते को सक्रिय रखने या केवाईसी अपडेट करने के नाम पर ग्राहक आईडी, जन्मतिथि, ओटीपी जैसी गोपनीय जानकारियां हासिल कर लेते हैं। इसके बाद वे खाते में अपना मोबाइल नंबर अपडेट करवाकर बैंकिंग सुविधाओं का दुरुपयोग करते हैं।
इसी प्रकार बैंक के नाम से फर्जी एसएमएस और ईमेल भेजे जाते हैं, जिनमें खाते के बंद होने या केवाईसी अपडेट करने का संदेश होता है। उपभोक्ता जैसे ही लिंक पर क्लिक करता है, वह नकली बैंकिंग वेबसाइट पर पहुंच जाता है, जहां दर्ज की गई जानकारी सीधे साइबर ठगों तक पहुंच जाती है।
साइबर क्राइम शाखा ने बताया कि अपराधी बाजार में उपलब्ध उपभोक्ता डेटा का उपयोग कर निष्क्रिय खातों की पहचान करते हैं और फिर ठगी की रकम को कई खातों में घुमा कर उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने का प्रयास करते हैं। इससे जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
राजस्थान पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि लंबे समय से उपयोग में नहीं आने वाले बैंक खातों को तत्काल बंद करवाएं। किसी भी व्यक्ति को लालच में आकर अपना बैंक खाता उपयोग के लिए न दें, क्योंकि यह गंभीर कानूनी अपराध है। सभी सक्रिय बैंक खातों में वर्तमान मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी अपडेट रखें तथा पुराने या बंद मोबाइल नंबर होने पर बैंक में जाकर तत्काल संशोधन करवाएं।
पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि पैन कार्ड के माध्यम से समय-समय पर यह जांच करें कि आपके नाम पर कितने बैंक खाते संचालित हैं। बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें और किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या लिंक से सतर्क रहें।
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है या ऐसी कोशिश की जाती है, तो वह तत्काल निकटतम पुलिस थाना अथवा साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवा सकता है।
राजस्थान पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता और सतर्कता है। निष्क्रिय बैंक खातों की समय रहते समीक्षा और सुरक्षा उपाय अपनाकर आमजन साइबर ठगी से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश