एसएमएस अस्पताल में सीआईडीपी के मरीज का पहला ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफल

 


जयपुर, 04 नवंबर (हि.स.)। एसएमएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ने चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यहां गंभीर और उपचार-प्रतिरोधी क्रोनिक इंफ्लेमेटरी डिमाइलिनेटिंग पोलीन्यूरोपैथी (सीआईडीपी) से पीड़ित 23 वर्षीय युवक का सफल ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया। राजस्थान में उपचार-प्रतिरोधी सीआईडीपी के मरीज के लिए इस तरह का यह पहला प्रत्यारोपण है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज की न्यूरोलॉजिकल स्थिति में सुधार हुआ है। मरीज की हालत स्थिर होने पर बुधवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

चिकित्सा हेमेटोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. विष्णु शर्मा ने बताया कि मरीज लंबे समय से सीआईडीपी के गंभीर स्वरूप से पीड़ित था। पारंपरिक उपचार पद्धतियों से उसे अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा था। न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. दिनेश खंडेलवाल मरीज का नियमित उपचार और फॉलोअप कर रहे थे। उपचार से पर्याप्त सुधार नहीं होने पर उन्होंने मरीज को ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए चिकित्सा हेमेटोलॉजी विभाग में रेफर किया।

डॉ. शर्मा ने बताया कि प्रत्यारोपण के बाद मरीज के विभिन्न न्यूरोलॉजिकल पैरामीटर्स में सुधार देखने को मिला है। मरीज ने उपचार के बाद अच्छी रिकवरी की और उसकी स्थिति स्थिर रही। इस जटिल प्रक्रिया को सफल बनाने में डॉ. देवेश पाराशर और न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. दिनेश खंडेलवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

चिकित्सकों के अनुसार, ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक उन्नत सेलुलर उपचार पद्धति है। इसमें मरीज की अपनी स्टेम सेल्स का उपयोग किया जाता है। गंभीर और पारंपरिक उपचारों से लाभ नहीं पाने वाले चुनिंदा सीआईडीपी मरीजों में यह पद्धति बीमारी पर लंबे समय तक नियंत्रण की संभावना प्रदान करती है।

प्रत्यारोपण को सफल बनाने में नर्सिंग टीम, प्रयोगशाला कर्मियों, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग और अन्य सहयोगी स्वास्थ्यकर्मियों का भी अहम योगदान रहा। एसएमएस मेडिकल कॉलेज की इस उपलब्धि को प्रदेश में उन्नत सेलुलर चिकित्सा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे गंभीर और जटिल बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए आधुनिक उपचार के नए विकल्प उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश