चित्तौड़गढ़ दुर्ग: विश्व धरोहर पर अतिक्रमण पर चलेगा कानून का डंडा, अवैध निर्माणों पर पहली एफआईआर

 


चित्तौड़गढ़, 11 जून (हि.स.)। विश्व विरासत में शुमार ऐतिहासिक संरक्षित चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर बिना अनुमति किये जा रहे अतिक्रमण और अवैध निर्माणों को लेकर लम्बे समय बाद प्रशासन ने पहल की है। विश्व धरोहर को बचाने के लिए जिला प्रशासन की पहल पर भारतीय पुरातत्व संरक्षण की रिपोर्ट पर प्रकरण दर्ज किया गया है। हालांकि यह प्रकरण दुर्ग के अतिक्रमण और अवैध निर्माणों पर ऊंट के मुंह में जीरे के समान है लेकिन करीब 8 साल बाद की यह पहल विरासत प्रेमियों के लिए उम्मीद की किरण है। हालांकि चित्तौड़गढ़ दुर्ग के अतिक्रमण और अवैध निर्माणों को लेकर पुरातत्व विभाग ने कई नोटिस देकर अपना कर्तव्य पूरा किया है लेकिन लम्बे समय बाद जिला कलक्टर के निर्देश पर एएसआई की रिपोर्ट पर एफआईआर दर्ज की गई है। एएसआई के संरक्षण सहायक प्रेमचन्द्र शर्मा ने कोतवाली में दी रिपोर्ट में बताया कि दुर्ग की प्राचीर के भीतर का पूरा क्षेत्र पुरातत्विय स्थल व अवशेष अधिनियम 1958 के तहत संरक्षित क्षेत्र घोषित है, जहां केन्द्र सरकार की अनुमति के बिना निर्माण, पुनर्निमाण, मरम्मत और अतिक्रमण जैसी गतिविधियां प्रतिबंधित है। उन्होंने प्रतापनगर निवासी युवराजादित्य पुत्र महेन्द्र सिंह के खिलाफ रतन सिंह महल के सामने निर्माणाधीन एक परिसर के एक मामले में धारा 19 (1) एवं 30 ए तथा धारा 229 (3) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज कराया है। कोतवाली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की है। वहीं जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह ने बताया कि संरक्षित क्षेत्र का सर्वेक्षण करार नियमों के विपरित पाये जाने पर अवैध निर्माणों पर नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी।

चित्तौड़गढ़ के दुर्ग पर वर्तमान में पुरातत्व विभाग के अनुसार 219 अतिक्रमण और अवैध निर्माण चिन्हित है। जिनमें विभाग की नाक के नीचे कुछ ही सालों में रिहायशी होटल सहित 8 पक्के रेस्टोरेंट निर्मित हो गये, लेकिन विभाग ने महज कार्यवाही के नाम पर नाेटिस देकर अपना कर्तव्य पूरा किया है।

इधर जानकारी देते हुए एएसआई के सरंक्षण सहायक प्रेमचन्द ने बताया कि अतिक्रमणों को लेकर मुख्यालय को जानकारी दी जा रही है वहीं जिला प्रशासन को भी अवगत कराया गया है। उन्होंने कहा कि 200 से अधिक कच्चे अतिक्रमणों, मकानों की मरम्मत के कार्यांे को चिन्हित किया है। जबकि होटल, रेस्टोरेंट और हेंडीक्राफ्ट के भवन पक्के अवैध निर्माण और अतिक्रमण में शामिल है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमियों को विभाग द्वारा नामजद भी किया हुआ है। इधर पूर्व में दिये गये नोटिस में पुरातत्व विभाग ने पुरातव्यिय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 की धारा के तहत चेतावनी दी है कि अतिक्रमण और अवैध निर्माण स्वयं के द्वारा हटाना होगा और ऐसा नहीं करने पर विभाग द्वारा अपनी शक्तियों का प्रयोग कर हटाया जायेगा जिसका खर्चा अतिक्रमी से वसूला जायेगा और 1 लाख रूपये से अधिक जुर्माना भी दंडित किया जायेगा।

दुर्ग पर हुए पक्के निर्माण और अितक्रमणों पर गंभीरता दिखाते हुए जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने बुधवार को दुर्ग के पक्के निर्माणों और अतिक्रमणों का निरीक्षण किया वहीं अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश दिये है। इधर जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि नियमों के अनुसार अतिक्रमण और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि 2020 के बाद करीब 8 पक्के निर्माण किये गये है। जिनके विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिये है। उन्होंने कहा कि विश्व विरासत में शुमार दुर्ग के संरक्षण के लिए जिला प्रशासन प्रतिबद्ध है और इस संबंध में वे स्वयं के स्तर पर पुरातत्व विभाग को डीओ लेटर लिखकर ध्वस्त करने की कार्यवाही को आगे बढ़ायेगी।

वर्ल्ड हेरिटेज साइट पर हुए अतिक्रमण और अवैध निर्माणों पर नोटिस और एफआईआर की कार्यवाही स्थानीय स्तर पर की जा रही है वहीं इन निर्माणों को हटाने के लिए अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश के जोधपुर मुख्यालय और दिल्ली केन्द्रीय मुख्यालय पर फाइल भेजी गई है जो अनुमोदन होने के पश्चात अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जायेगी। वहीं अतिक्रमियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होगी।

दुर्ग पर लगातार हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमियों ने दुर्ग की विशेषता बावड़ियों के प्राकृतिक जल प्रवाह तक को अवरोधित कर दिया है। दुर्ग पर स्थित 84 कुंड और बावड़ियों में प्राकृतिक रूप से एक दूसरे से जल प्रवाह होता है। ऊंचे स्थानों से पानी बहकर इन बावड़ियों में एकत्र होता है और प्राकृतिक रूप से छनकर कुंडों में पहुंचता है जो दुर्ग की विशेषता भी है लेकिन अतिक्रमियों ने प्राकृतिक जल प्रवाह तक को कई स्थानों पर अवरूद्ध कर दिया है और छोटे नालों को बंद कर दिया है। रतन सिंह महल के तालाब सहित कई तालाबों में पानी की कमी होने की संभावना बढ़ती जा रही है। बड़ी बात यह है कि अतिक्रमण और अवैध निर्माण इतने बढ़ गये है कि चित्तौड़गढ़ शहर से ही गननचुम्बी होटल देखी जा सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल