जयपुर मेट्रो फेज-2 को केंद्र की मंजूरी, 41 किमी कॉरिडोर से बदलेगी शहर की तस्वीर

 


जयपुर, 08 अप्रैल (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में जयपुर मेट्रो फेज-2 को मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना की लागत बढ़ाने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई है। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को सितंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

करीब 41 किलोमीटर लंबे इस मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण से जयपुर शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। यह परियोजना शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो न केवल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी बल्कि ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या को भी कम करने में मददगार साबित होगी।

वर्तमान में जयपुर मेट्रो के पहले चरण में करीब 60 हजार यात्री प्रतिदिन यात्रा करते हैं। फेज-1 के तहत 11.64 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर 11 स्टेशन संचालित हो रहे हैं। लेकिन फेज-2 के शुरू होने के बाद यात्री संख्या में कई गुना वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और शहर में ट्रैफिक दबाव में भी कमी आएगी। जयपुर मेट्रो फेज-2 के तहत शहर के उत्तर से दक्षिण तक एक विस्तृत नेटवर्क तैयार किया जाएगा। यह कॉरिडोर प्रहलादपुरा (सांगानेर) से टोडी मोड़ (हरमाड़ा) तक विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के तहत कुल 36 मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे, जिससे शहर के प्रमुख इलाकों को सीधी और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी।

इस मेट्रो नेटवर्क के जरिए सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया, वीकेआई, जयपुर एयरपोर्ट, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल, एसएमएस स्टेडियम, अंबाबाड़ी और विद्याधर नगर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा। विशेष रूप से एयरपोर्ट क्षेत्र में अंडरग्राउंड स्टेशन बनाए जाने की योजना है, जिससे यात्रियों को आधुनिक और सुविधाजनक परिवहन सुविधा मिल सकेगी। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 13,037.66 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसे राजस्थान मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा। परियोजना में केंद्र और राज्य सरकार की 50:50 भागीदारी होगी, जबकि शेष राशि के लिए बैंकों से ऋण लिया जाएगा।

मेट्रो फेज-2 के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी गई थी। इसके बाद पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड और इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप द्वारा इसका गहन आकलन किया गया, जिसके पश्चात इसे मंजूरी प्रदान की गई। फेज-2 के शुरू होने के बाद जयपुर में एक समग्र और एकीकृत मेट्रो नेटवर्क तैयार होगा। यह नेटवर्क फेज-1 से इंटरचेंज और फीडर सिस्टम के माध्यम से जुड़कर पूरे शहर में सहज आवागमन सुनिश्चित करेगा। इससे न केवल दैनिक यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश