वर्ष 2047 तक अर्थव्यवस्था में पर्यटन का योगदान 10 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य: शेखावत
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने कहा- गरीबी रेखा से बाहर आए 25 करोड़ से अधिक लोग
जोधपुर, 11 जुलाई (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक देश की अर्थव्यवस्था में पर्यटन क्षेत्र का योगदान वर्तमान में 6 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। अल्पकालिक लक्ष्य के रूप में वर्ष 2030 तक इसे 7 प्रतिशत तक पहुंचाने की दिशा में केंद्र सरकार तेजी से कार्य कर रही है।
शनिवार को जोधपुर प्रवास के दौरान अपने निवास पर मीडिया से बातचीत में शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक पहचान लगातार मजबूत हुई है, जिसका सकारात्मक प्रभाव पर्यटन क्षेत्र पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं घरेलू पर्यटन में भी अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन एक विकेंद्रीकृत अर्थव्यवस्था का सशक्त माध्यम है, जिससे विकास का लाभ सीधे स्थानीय लोगों तक पहुंचता है। पर्यटन से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, खान-पान, स्थानीय उत्पादों और अन्य अनेक क्षेत्रों में रोजगार एवं आय के अवसर बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार सृजित करने की क्षमता पर्यटन क्षेत्र में है और सरकार इसी दृष्टि से पर्यटन अवसंरचना एवं सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दे रही है। शेखावत ने कहा कि केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के परिणामस्वरूप 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। वर्ष 2014 की तुलना में देश की अर्थव्यवस्था दोगुने से अधिक आकार की हो चुकी है। प्रति व्यक्ति आय और किसानों की आय में वृद्धि हुई है। महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण के कारण लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी है, जिससे घरेलू पर्यटन को भी बड़ा प्रोत्साहन मिला है।
राजस्थान में स्थानांतरण प्रक्रिया पर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लंबे समय बाद स्थानांतरण पर लगी रोक हटने के बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुंचे। कई कर्मचारियों ने पारिवारिक परिस्थितियों, स्वास्थ्य संबंधी कारणों तथा अन्य व्यावहारिक कठिनाइयों के आधार पर स्थानांतरण का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि उनके कार्यालय की ओर से ऐसे मामलों में संबंधित मंत्रियों को पत्र लिखकर कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराया गया।
उन्होंने कहा कि अधिकांश पात्र कर्मचारियों को स्थानांतरण का लाभ मिल चुका है, जबकि कुछ मामलों में अभी भी आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। इनमें प्रतिकूल स्थानों पर पदस्थापन अथवा अन्य प्रशासनिक कारणों से जुड़े प्रकरण भी शामिल हैं। यह एक स्वाभाविक प्रशासनिक प्रक्रिया है और आने वाले कुछ दिनों तक जारी रहेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश