बीकानेर रेल मंडल में आरयूबी जलभराव से निपटने के लिए 135 पंप तैनात

 




बीकानेर, 09 अगस्त (हि.स.)। उत्तर-पश्चिम रेलवे के बीकानेर मंडल ने बरसात के मौसम में सुरक्षित रेल संचालन के लिए विशेष तैयारियां की हैं। मंडल के सभी रेलखंडों में पटरियों और आरयूबी के आसपास ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त किया गया है। इसका उद्देश्य वर्षा जल के एकत्रित होने की स्थिति को रोकना है। अत्यधिक बारिश में आरयूबी में जलभराव होने पर पानी निकालने के लिए मंडल में करीब 135 पंप तैनात किए गए हैं।

मंडल वाणिज्य प्रबंधक बीकानेर वीरेंद्र जोशी ने बताया कि बारिश के दौरान ट्रैक के रखरखाव पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। ट्रैक पर कटाव की आशंका वाले स्थानों की पहचान की गई है। इन स्थानों को मिट्टी और गिट्टी डालकर मजबूत किया गया है। आपात स्थिति से निपटने के लिए कटाव वाले स्थानों पर प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी और गिट्टी भरकर भी रखी गई है।

उन्होंने बताया कि सभी रेलवे अंडरब्रिज में जलस्तर की निगरानी के लिए दीवारों पर सेंटीमीटर के निशान लगाए गए हैं। 50 सेंटीमीटर से अधिक पानी होने पर अंडरब्रिज से आवागमन नहीं करने की सूचना भी दी गई है। रेलवे ने आमजन से अपील की है कि जलस्तर निर्धारित सीमा से अधिक होने पर अंडरब्रिज पार नहीं करें। इससे दुर्घटना का खतरा हो सकता है।

बारिश के दौरान सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारी ट्रैक सर्किट का विशेष रखरखाव कर रहे हैं। संबंधित उपकरणों का भी नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। ट्रैकमैन लगातार रेलखंडों की गश्त कर रहे हैं। गश्त के दौरान कटाव या अन्य खतरा दिखाई देने पर तत्काल संबंधित अधिकारी को सूचना दी जाती है। इससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

रेलवे ने ट्रैक मेंटेनरों को सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध कराए हैं। इनमें लाल बैनर, लाल हाथ सिग्नल और डेटोनेटर शामिल हैं। अचानक ट्रैक पर गंभीर कटाव या अन्य खतरा उत्पन्न होने पर डेटोनेटर का उपयोग किया जाता है। यह रेलगाड़ी के पहियों के नीचे आने पर तेज आवाज करता है। इससे लोको पायलट को आगे खतरे की सूचना मिलती है। वह समय रहते गति नियंत्रित कर ट्रेन को रोक सकता है।

बीकानेर मंडल में चढ़ाई वाले रेल मार्गों पर लोडेड मालगाड़ियों के संचालन को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। ऐसी मालगाड़ियों को यथासंभव थ्रू सिग्नल दिए जा रहे हैं। इससे बारिश के कारण ट्रैक पर फिसलन की स्थिति में गाड़ी के संचालन पर असर कम होता है। साथ ही लाइन बर्निंग जैसी समस्या की आशंका भी कम होती है। इससे ट्रैक की सुरक्षा बनी रहती है। अन्य ट्रेनों की समयपालनता बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव