जाति जनगणना की प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण, सही आंकड़े सामने नहीं आने की आशंका: अशोक गहलोत
जयपुर, 25 अगस्त (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया को पूरी तरह त्रुटिपूर्ण बताते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। गहलोत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि जाति जनगणना को लेकर अपनाई जा रही प्रक्रिया से सही आंकड़े सामने नहीं आ पाएंगे और इससे जाति जनगणना का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो सकता है।
गहलोत ने कहा कि जाति जनगणना की घोषणा के समय सभी ने इसका स्वागत किया था, लेकिन अब जिस तरह की भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है, उससे केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रक्रिया कोई संयोग नहीं, बल्कि ऐसी रणनीति प्रतीत होती है, जिससे जाति जनगणना का मुख्य उद्देश्य ही खत्म हो जाए और सही आंकड़े सामने न आ सकें।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जाति की जानकारी जुटाने के लिए अपनाए जा रहे ‘मुक्त प्रश्न’ यानी ओपन एंडेड प्रश्न के तरीके पर गंभीर आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि इसमें प्रत्येक व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, वही लिखा जाएगा। भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों, उपजातियों और भाषाओं के नाम से जानी जाती है। ऐसे में एक ही जाति के हजारों अलग-अलग नाम दर्ज होने की आशंका है, जिससे जनगणना के आंकड़े बिखर सकते हैं और उनका उपयोग करना मुश्किल हो जाएगा।
गहलोत ने यह भी सवाल उठाया कि मौजूदा प्रश्नावली में ‘पिछड़ा वर्ग’ शब्द तक शामिल नहीं है। ऐसे में पिछड़े वर्ग की वास्तविक आबादी का सटीक आंकड़ा सामने आने में परेशानी होगी।
उन्होंने कहा कि जब जाति जनगणना का उद्देश्य सामाजिक संरचना और विभिन्न वर्गों की वास्तविक स्थिति का आंकड़ा जुटाना है, तो प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे आंकड़े स्पष्ट और विश्वसनीय रूप से सामने आ सकें।
गहलोत ने अपनी पोस्ट में बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया में बदलाव की मांग की है। पत्र में जातियों की सूची पहले से तैयार करने का सुझाव दिया गया है।
गहलोत के अनुसार तेलंगाना में 2024 और बिहार में 2022 में हुए जाति सर्वेक्षणों में इसी तरह सूचीबद्ध प्रक्रिया अपनाई गई थी।
गहलोत ने केंद्र सरकार से मौजूदा प्रक्रिया को तत्काल रद्द कर राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से बातचीत करने के बाद नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जाति जनगणना तभी सार्थक साबित होगी, जब उसके आंकड़े सटीक, विश्वसनीय और समाज के विभिन्न वर्गों की वास्तविक स्थिति को प्रतिबिंबित करने वाले हों। उन्होंने केंद्र से ऐसी प्रक्रिया अपनाने का आग्रह किया जिससे जाति जनगणना देश के लिए उपयोगी और लाभकारी साबित हो सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित