मथुरादास माथुर अस्पताल : कार्डियक अरेस्ट के बाद 15 मिनट में रेस्क्यू एंजियोप्लास्टी

 


जोधपुर, 16 सितम्बर (हि.स.)। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के एमडीएम अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग ने एक असंभव से दिखने वाले केस को संभव कर दिखाया। कॉर्डियोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ रोहित माथुर ने बताया की 41 वर्षीय युवक को हार्ट अटैक के बाद कार्डियक अरेस्ट होने के बावजूद नया जीवन मिला।

नागौर से रैफर मरीज को एक्यूट एंटीरियर वॉल एम आई (बड़ा हार्ट अटैक) आया था। हाल ही में सडक़ हादसे में पसलियों में फ्रैक्चर होने से उसे वहां थ्रोम्बोलिसिस इंजेक्शन नहीं दिया जा सका। दर्द शुरू होने के साढ़े 3 घंटे बाद वह एम डी एम इमरजेंसी पहुंचा।

सीसीयू में आते ही मरीज का दिल बंद हो गया और कार्डियक अरेस्ट हो गया। सीसीयू टीम ने तुरंत सीपीआर शुरू किया, इंट्यूबेट कर शॉक दिया। काफी मशक्कत के बाद दिल की धडक़न वापस आई, लेकिन स्थिति बेहद गंभीर थी। मरीज कोमा में (ई 1वी 1एम 1), पुतलियां फैली हुई, बी पी रिकॉर्ड नहीं हो रहा था और इको में हार्ट सिर्फ 10-15 फीसदी ही काम कर रहा था।

आमतौर पर ऐसी स्थिति में सिर्फ सपोर्टिव इलाज दिया जाता है, लेकिन टीम ने भरोसा दिखाते हुए रेस्क्यू एंजियोप्लास्टी का फैसला लिया। मरीज को वेंटिलेटर पर ही कैथ लैब शिफ्ट किया गया। लैब में भी उसे बार-बार खतरनाक वी टी/वी एफ हुआ जिसके लिए शॉक देना पड़ा। जांच में दिल की मुख्य धमनी एलएडी 100 फीसदी बंद मिली। टीम ने मात्र 15 मिनट के अंदर एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी कर धमनी को खोल दिया।

प्रक्रिया के बाद मरीज वेंटिलेटर और हाई-डोज दवाओं पर रहा। अगले दिन मरीज होश में आ गया और वेंटिलेटर हटा दिया गया। कुछ दिन दवाओं के सहारे रहने के बाद 10 दिनों के अथक परिश्रम के बाद मरीज को पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में घर भेज दिया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश