राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र का 43वां स्थापना दिवस, ऊंट संरक्षण और उद्यमिता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

 


बीकानेर, 05 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर का 43वां स्थापना दिवस शनिवार को उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर उष्ट्र संरक्षण एवं उद्यमिता विकास : विकसित भारत–2047 की दिशा में विषय पर राष्ट्रीय किसान संगोष्ठी एवं कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों, पशुपालकों, वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, विद्यार्थियों तथा आईसीएआर के विभिन्न संस्थानों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया।

मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद डॉ. सतीश पूनिया ने कहा कि ऊंट केवल मरुस्थल का जहाज नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर जीवन का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान जिस तरह कृषि क्षेत्र ने देश की अर्थव्यवस्था को संभाला, उसी प्रकार ऊंट विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और जीवटता का प्रतीक है। उन्होंने ऊंटों की घटती संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि मरुस्थलीय संस्कृति, खेजड़ी और पारंपरिक धरोहर के संरक्षण के लिए ऊंट संरक्षण को जन-आंदोलन बनाना होगा।

इस अवसर पर डॉ. पूनिया ने ऊंटनी के दूध से तैयार मूल्यवर्धित उत्पाद 'राजभोग आइसक्रीम' का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि ऊंटनी के दूध में पोषण और स्वास्थ्य की अपार संभावनाएं हैं तथा इस क्षेत्र में और अधिक वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता है। उन्होंने 'एक ऊंट मेरे नाम' अभियान से जुड़ने का भी आह्वान किया।

विशिष्ट अतिथि राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (राजुवास) के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने भी ऊंट संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।

केन्द्र के निदेशक एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने एनआरसीसी : विगत उपलब्धियां एवं भावी कार्ययोजना विषय पर प्रस्तुतीकरण देते हुए कहा कि ऊंट संरक्षण का सबसे प्रभावी माध्यम ऊंट पालकों का सशक्तीकरण है। उन्होंने ऊंटनी के दूध को रेगिस्तान की डेयरी बताते हुए इसके मूल्य संवर्धन, वैज्ञानिक अनुसंधान, जन-जागरूकता तथा 'आई लव कैमल मिल्क' अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि ने एनआरसीसी स्थापना स्मृति स्तंभ का अनावरण किया, मरुस्थल से आकाश तक : एनआरसीसी के 43 वर्ष थीम पर गुब्बारे उड़ाकर स्थापना दिवस का संदेश दिया तथा परिसर में पौधरोपण किया। उन्होंने उष्ट्र संग्रहालय और ऊंटनी के दूध, ऊंट के बाल, चमड़े एवं अन्य वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियों पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

समारोह की शुरुआत किसान-वैज्ञानिक संवाद से हुई, जिसमें किसानों और पशुपालकों को उन्नत कृषि एवं पशुपालन तकनीकों, ऊंट स्वास्थ्य, पोषण, मूल्य संवर्धन तथा उद्यमिता विकास की जानकारी दी गई। इस दौरान केन्द्र के नवीन प्रकाशन का विमोचन किया गया, अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत किसानों को कृषि आदानों का वितरण किया गया तथा संविदा आधारित सहायक कर्मचारियों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में आयोजन सचिव डॉ. राकेश रंजन ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, किसानों, अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन नेमीचंद बारासा ने किया। राष्ट्रगान और सामूहिक छायाचित्र के साथ समारोह का समापन हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव