श्रम संहिताओं के खिलाफ मनाया काला दिवस
जोधपुर, 01 अप्रैल (हि.स.)। शहर में आज विभिन्न श्रम संगठनों ने चार श्रम संहिताओं के खिलाफ काला दिवस मनाया और कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करते हुए एडीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
इंटक के प्रांतीय उपाध्यक्ष मंडल दत्त जोशी व रेलवे कर्मचारी नेता मनोज परिहार ने बताया कि केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, स्वतंत्र फेडरेशनों और एसोसिएशनों के मंच ट्रेड यूनियनों ने आज काला दिवस मनाया। यह दिन केंद्र सरकार द्वारा चार श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय नियमों की अधिसूचना के लिए पहले से घोषित तिथि है।
इस अवसर पर इंटक नेता मंडल दत्त जोशी ने बताया कि ट्रेड यूनियनें लगातार इन श्रम विरोधी, नियोक्ता-समर्थक श्रम संहिताओं का विरोध करती रही हैं, जिन्हें तथाकथित श्रम सुधार के नाम पर लाया गया है। गत बारह फरवरी की आम हड़ताल के बाद भी केंद्र सरकार इन श्रम संहिताओं को वापस लेने या इस मुद्दे पर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ कोई सार्थक बैठक करने से बच रही है। इसके अलावा, इन संहिताओं के मसौदा तैयार करने के चरण से ही ट्रेड यूनियनों जैसे हितधारकों से कोई परामर्श नहीं किया गया।
मनोज परिहार ने कहा कि ये श्रम संहिताएं देश के श्रमिकों को फिर से ब्रिटिश औपनिवेशिक काल जैसी शोषणकारी परिस्थितियों में धकेलने का प्रयास हैं। श्रमिक वर्ग ने औपनिवेशिक काल में अत्यधिक शोषण के खिलाफ और स्वतंत्र भारत में भी 8 घंटे के कार्यदिवस, कार्यस्थल सुरक्षा, यूनियन बनाने और संगठित होने के अधिकार, सामूहिक सौदेबाजी, आंदोलन करने और हड़ताल के अधिकार के लिए संघर्ष किया है।
मुकेश सक्सेना ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा, ठेका श्रमिकों के नियमितीकरण, स्थायी कार्यों में ठेका प्रथा समाप्त करने, समान काम के लिए समान वेतन, बोनस, ग्रेच्युटी और पेंशन के अधिकार के लिए भी लड़ाई लड़ी है।
न्यूनतम वेतन कानूनों को कमजोर कर गरीबी रेखा से नीचे राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन लागू करने की कोशिश की जा रही है। ये संहिताएं संगठित क्षेत्र को असंगठित बनाने और असंगठित श्रमिकों को अधिकारों से वंचित करने की दिशा में हैं।
ऐसी स्थिति में ट्रेड यूनियनों और श्रमिक संगठनों के पास इन श्रम संहिताओं के खिलाफ संघर्ष जारी रखने और उनके क्रियान्वयन के खिलाफ प्रतिरोध खड़ा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
प्रदर्शन में रविंद्र प्रजापत, परमानंद, विक्रम सिंह, बन्ने सिंह, दीपेन्द्र सिंह, मुकेश सक्सेना, प्रीतम सिंह, जयराम खांगटा, मण्डल दत्त जोशी, पुखराज सांखला, बद्री नारायण परिहार, धीरेंद्र सिंह, घनश्याम गोयल, मदन लाल मेघवाल, जगदीप सोलंकी इत्यादि ने अपने विचार व्यक्त किए।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश