राहुल गांधी संवैधानिक संस्थाओं की छवि धूमिल कर रहे हैं : मदन राठौड़

 


जयपुर, 12 अक्टूबर (हि.स.)। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के नेताओं पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर जनता में अविश्वास पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कभी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), तो कभी ईवीएम को मुद्दा बनाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं। बिना ठोस आधार के आरोप लगाना और जनता को गुमराह करना उचित नहीं है।

राठौड़ ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठाने से जनता के मन में अविश्वास पैदा होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई नेता तथ्यों के बजाय बयानबाजी के माध्यम से राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। जनता को गुमराह कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिशें स्वीकार नहीं की जा सकतीं।

राठौड़ ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर रहते हुए राहुल गांधी को अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप गंभीरता दिखानी चाहिए। नेता प्रतिपक्ष का दायित्व केवल सरकार पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर जनहित के मुद्दे उठाना और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करना भी है।

उन्होंने महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर भी कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए। राठौड़ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस महिलाओं से जुड़े मामलों में राजनीतिक सुविधा के अनुसार प्रतिक्रिया देती है और अपने नेताओं के मामलों में अलग रुख अपनाती है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन महिला सम्मान, सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा से समझौता नहीं होना चाहिए।

राठौड़ ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में कांग्रेस सांसद और एक प्रोफेसर को जांच के बाद सेवा से बर्खास्त किए जाने के मामले का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि कांग्रेस ऐसे मामलों में संरक्षण क्यों देती है। उन्होंने कहा कि देश की जनता आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से ऊपर उठकर जिम्मेदार, तथ्यपरक और जनहितकारी राजनीति की अपेक्षा करती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश