गहलोत का बयान कांग्रेस की तानाशाही मानसिकता का प्रमाण : मदन राठौड़

 


जयपुर, 14 जून (हि.स.)। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाजपा पर प्रतिबंध लगाने संबंधी बयान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे कांग्रेस की तानाशाही मानसिकता और लोकतंत्र विरोधी सोच का परिचायक बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की टिप्पणियां कांग्रेस के उस राजनीतिक चरित्र को उजागर करती हैं, जिसने अतीत में देश पर आपातकाल थोपकर लोकतांत्रिक मूल्यों को आघात पहुंचाया था।

राठौड़ ने रविवार को जारी बयान में कहा कि गहलोत का यह कहना कि यदि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आज होतीं तो भाजपा पर प्रतिबंध लगा देतीं, कांग्रेस की सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुनी गई सरकार और देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी पर प्रतिबंध लगाने की बात करना किसी भी वरिष्ठ नेता को शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को 1975 के आपातकाल को नहीं भूलना चाहिए, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद देश में आपातकाल लागू किया गया था। उस दौर में लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ और बाद में जनता ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का संदेश दिया। राठौड़ ने कहा कि 25 जून को देश एक बार फिर आपातकाल की वर्षगांठ के रूप में उस काले अध्याय को याद करेगा।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अशोक गहलोत जैसे वरिष्ठ नेता द्वारा इस प्रकार की बयानबाजी करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत केवल राजनीतिक सुर्खियों में बने रहने अथवा अपने राजनीतिक नेतृत्व को खुश करने के उद्देश्य से इस तरह के बयान दे रहे हैं। इससे उन्हें भले ही क्षणिक राजनीतिक लाभ मिले, लेकिन जनता के बीच उनकी छवि प्रभावित हो रही है।

राठौड़ ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों की प्रतिस्पर्धा और जनमत का सम्मान सर्वोपरि होता है। किसी राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाने की बात करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है और यह राजनीतिक असहिष्णुता को दर्शाता है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत का उल्लेख किए जाने पर भी आपत्ति जताई। राठौड़ ने कहा कि भगवान राम भारतीय संस्कृति और करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। राम मंदिर अथवा भगवान राम के नाम का उल्लेख करना किसी भी दृष्टि से गलत नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व की सोच से यह प्रतीत होता है कि उसे न तो भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं में विश्वास है और न ही लोकतांत्रिक विचारों में पूर्ण आस्था।

राठौड़ ने कहा कि देश की जनता जागरूक है और लोकतंत्र को कमजोर करने वाली किसी भी सोच को स्वीकार नहीं करेगी। भारत में लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत हैं और किसी भी प्रकार की तानाशाही मानसिकता के लिए कोई स्थान नहीं है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश