सावधान! एक से ज्यादा बार बायोमेट्रिक पंच कराया तो आपकी आईडी पर चल सकती हैं फर्जी सिम

 


जयपुर, 02 अक्टूबर (हि.स.)। अगर आप अपनी आईडी पर किसी दूसरे व्यक्ति को सिम दिलवाते हैं या सिम लेते समय रिटेलर के कहने पर बार-बार बायोमेट्रिक पंच करते हैं तो सावधान हो जाइए। आपकी पहचान का इस्तेमाल फर्जी सिम जारी कर जासूसी, साइबर ठगी और गैंगस्टर्स की रंगदारी में किया जा सकता है। जयपुर पुलिस ने फर्जी सिम के बढ़ते इस्तेमाल को गंभीर सुरक्षा खतरा मानते हुए सिम विक्रेताओं पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों के डीलर या सब-डीलर किसी अन्य व्यक्ति के पहचान पत्र और दस्तावेजों का अनधिकृत इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से मोबाइल कनेक्शन जारी कर देते हैं। ऐसे नंबरों का इस्तेमाल पुलिस और जांच एजेंसियों को गुमराह करने के साथ आपराधिक और देशविरोधी गतिविधियों में किया जा रहा है।

एडिशनल पुलिस कमिश्नर प्रदीप मोहन शर्मा ने बताया कि प्रीपेड और पोस्टपेड कनेक्शन जारी करने वाले रिटेलर व सब-रिटेलर को रोजाना सिम खरीदार का नाम, पूरा पता, पहचान पत्र की प्रति और फोटो का रिकॉर्ड रखना होगा। यह जानकारी हर महीने ई-मेल से साझा करनी होगी। संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को देनी होगी। रिकॉर्ड पांच साल तक सुरक्षित रखना होगा और जांच एजेंसी के मांगने पर उपलब्ध कराना होगा।

सेंट्रल साइबर क्राइम थाना अधिकारी गजेंद्र शर्मा के अनुसार फर्जी सिम साइबर अपराधियों तक पहुंचाने के दो प्रमुख तरीके सामने आए हैं। पहले में सिम लेते समय रिटेलर किसी बहाने से ग्राहक का बायोमेट्रिक एक से अधिक बार दर्ज कर लेता है। एक सिम ग्राहक को देकर अन्य सिम उसी पहचान पर साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा दी जाती हैं। दूसरे मामले में लोग पैसे के लालच में अपने नाम से जारी सिम अपराधियों को दे देते हैं।

जांच में सामने आया है कि विदेश में बैठे साइबर ठग भारतीय नंबरों से कॉल कर ठगी करते हैं। भारत में उनका नेटवर्क फर्जी सिम उपलब्ध कराता है। साइबर स्लेवरी गिरोह में शामिल युवा भी अपने नाम से सिम लेकर विदेश ले जाते हैं। इसके बदले उन्हें अतिरिक्त कमीशन मिलने की बात सामने आई है।

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद राजस्थान पुलिस की इंटेलिजेंस विंग की कार्रवाई में पकड़े गए संदिग्ध जासूसों के मोबाइल की जांच में सामने आया कि पाकिस्तानी हैंडलर्स भारतीय नंबरों से चल रहे सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए संपर्क करते थे। आरोपित अपने नाम से सिम लेकर उसका नंबर हैंडलर्स को देते थे। ओटीपी उपलब्ध कराने के बाद उसी नंबर से व्हाट्सऐप अकाउंट शुरू कर दिया जाता था।

विदेश में बैठे गैंगस्टर्स भी भारतीय नंबरों का इस्तेमाल कारोबारियों से रंगदारी मांगने और धमकाने में करते हैं। डब्बा कॉलिंग में 24 से 48 सिम एक बॉक्स में लगाई जाती हैं। विदेश से की गई कॉल इस बॉक्स के जरिए भारतीय मोबाइल नंबर के रूप में दिखाई देती है। इससे कॉल की वास्तविक विदेशी लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश