बीकानेर अस्पताल प्रकरण की उच्च स्तरीय समीक्षा, चिकित्सा मंत्री ने दिए निष्पक्ष जांच के निर्देश
जयपुर, 09 जून (हि.स.)। बीकानेर स्थित पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं के स्वास्थ्य से जुड़े प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने मंगलवार को विभागीय अधिकारियों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उच्च स्तरीय बैठक लेकर पूरे मामले की समीक्षा की। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने उपलब्ध चिकित्सकीय तथ्यों और रिपोर्टों के आधार पर वस्तुस्थिति से अवगत कराया तथा मरीजों के उपचार और वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
बैठक में बताया गया कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में सिजेरियन प्रसव के बाद प्रसूताओं की किडनी खराब होने और छह महिलाओं को गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती किए जाने का उल्लेख किया गया है। हालांकि उपलब्ध चिकित्सकीय अभिलेखों और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार मामला केवल सिजेरियन प्रसव से जुड़ा नहीं है, बल्कि संबंधित महिलाएं पहले से ही गंभीर और जटिल चिकित्सकीय परिस्थितियों के साथ अस्पताल में भर्ती हुई थीं।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिन पांच मरीजों के संबंध में चर्चा की जा रही है, उनमें से तीन का प्रसव सामान्य प्रक्रिया से तथा दो का सिजेरियन शल्य क्रिया के माध्यम से हुआ था। ये सभी महिलाएं 15 मई से 3 जून 2026 के बीच पीबीएम अस्पताल में भर्ती हुई थीं।
बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार एक मरीज गंभीर एक्लेम्पसिया से पीड़ित थी। एक्लेम्पसिया गर्भावस्था से जुड़ी अत्यंत गंभीर स्थिति होती है, जिसमें उच्च रक्तचाप के साथ दौरे पड़ने की संभावना रहती है और समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकती है। मरीज की हालत बिगड़ने पर उसे आईसीयू में भर्ती किया गया तथा कई बार डायलिसिस करना पड़ा। चिकित्सकों के अनुसार उसकी स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।
अन्य मरीजों में प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव, मूत्र की मात्रा में कमी तथा अन्य गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएं पाई गईं, जिसके कारण उन्हें विशेष उपचार और डायलिसिस की आवश्यकता हुई। चिकित्सकों ने बताया कि अधिकांश मरीजों की स्थिति वर्तमान में स्थिर और सामान्य है तथा वे निरंतर निगरानी में हैं।
बैठक में यह भी साफ किया गया कि पीबीएम अस्पताल प्रदेश का प्रमुख तृतीयक रेफरल चिकित्सा संस्थान है, जहां बीकानेर संभाग सहित आसपास के जिलों से गंभीर और जटिल मामलों को उपचार के लिए भेजा जाता है। ऐसे में अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य अस्पतालों की तुलना में अधिक जटिल होती है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित मरीजों को विभिन्न चिकित्सकीय कारणों से डायलिसिस की आवश्यकता हुई। सभी मरीजों का उपचार विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम की देखरेख में निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार किया जा रहा है।
चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्रभावित मरीजों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और उनके उपचार में किसी प्रकार की कमी नहीं रहे। उन्होंने प्रत्येक मामले की गहन चिकित्सकीय तथा प्रशासनिक जांच सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि अब तक उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला चिकित्सकीय लापरवाही का प्रतीत नहीं होता है, लेकिन जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार कार्मिकों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि मामले के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जा रही है तथा अंतिम निष्कर्ष तथ्यों और विशेषज्ञ रिपोर्टों के आधार पर ही निकाले जाएंगे। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे मामले से संबंधित केवल अधिकृत और तथ्यात्मक जानकारी पर ही भरोसा करें।
उन्होंने अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था, उपचार प्रोटोकॉल की प्रभावी पालना तथा गुणवत्ता मानकों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और मरीजों के उपचार में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल, राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पुखराज सेन, औषधि नियंत्रण आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित