भीलवाड़ा में जैविक खेती पर राष्ट्रीय मंथन शुरू, 17 राज्यों के 1120 किसान पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में जुटे

 








भीलवाड़ा, 27 मई (हि.स.)। जैविक और गौ आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भीलवाड़ा में मंगलवार से पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ। रीको औद्योगिक क्षेत्र स्थित आरसीएम वर्ल्ड में आयोजित इस राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के 17 राज्यों से 1120 किसानों ने भाग लिया है। शिविर में किसानों को गौ आधारित प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि तकनीकों, मिट्टी संरक्षण, बीज उपचार और पोषण वाटिका जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कार्यक्रम का आयोजन महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर तथा कृषि विश्वविद्यालय कोटा के सहयोग से श्रीरामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, सरोज देवी फाउंडेशन, अमृता देवी पर्यावरण नागरिक संस्थान और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण 31 मई तक चलेगा।

कार्यक्रम समन्वयक महेश चंद्र नवहाल ने बताया कि प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ अतिथियों द्वारा तुलसी के गमले में जल अर्पित कर किया गया। उद्घाटन सत्र में डॉ. प्रताप धाकड़ महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रताप धाकड़, डॉ. विमला डुकवाल कृषि विश्वविद्यालय कोटा की कुलपति डॉ. विमला डुकवाल, अशोक कोठारी विधायक अशोक कोठारी, जसमीत सिंह संधु जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधु, गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक ताराचंद गोयल, आरसीएम के निदेशक तिलोक छाबड़ा तथा अपना संस्थान के विनोद मेलाना मौजूद रहे।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. प्रताप धाकड़ ने कहा कि 1950 के दशक में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए हरित क्रांति की शुरुआत की गई थी, लेकिन समय के साथ रासायनिक खेती पर बढ़ती निर्भरता ने नई समस्याओं को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की बढ़ती घटनाएं रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों की ओर संकेत करती हैं। ऐसे में गौ आधारित जैविक और प्राकृतिक खेती भविष्य के लिए सुरक्षित विकल्प बन सकती है।

इस अवसर पर महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और श्रीरामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के बीच जैविक खेती के शोध और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए गए।

डॉ. विमला डुकवाल ने कहा कि जैविक खेती के विस्तार के लिए चलाया जा रहा “सुविचार अभियान” सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि विषैले खाद्यान्न समाज और विशेष रूप से मातृशक्ति के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। भारतीय कृषि परंपरा में बीज उपचार, भूमि पूजन और प्रकृति सम्मान की जो परंपराएं थीं, उन्हें पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।

जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधु ने कहा कि वर्तमान समय में कृषि, स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान जैविक खेती ही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भी प्राकृतिक खेती को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है।

विधायक अशोक कोठारी ने कहा कि गौ माता आधारित कृषि व्यवस्था किसानों को बेहतर पोषण, अच्छा स्वास्थ्य और सकारात्मक सोच प्रदान करेगी। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।

आरसीएम के निदेशक तिलोकचंद छाबड़ा ने कहा कि “सुविचार अभियान” के माध्यम से हर गांव तक जैविक खेती की अवधारणा पहुंचाने और किसानों से सतत संवाद बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और किसानों को समय पर तकनीकी समाधान उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक ताराचंद गोयल ने कहा कि जैविक खेती तभी व्यापक रूप से सफल होगी जब इससे किसानों की आय बढ़ेगी और खेती की लागत घटेगी। उन्होंने लागत कम करने वाली तकनीकों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

अपना संस्थान के सचिव विनोद मेलाना ने बताया कि “सुविचार अभियान” के तहत अब तक बड़ी संख्या में किसानों को जैविक खेती से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण शिविर में शामिल सभी प्रतिभागियों को पांच दिनों तक गौ आधारित कृषि की संपूर्ण जानकारी और प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण के प्रथम दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. पवन टांक ने जैविक खेती की समग्र अवधारणा पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मिट्टी की संरचना, जल संरक्षण, बीज चयन, खेत की बनावट और पोषण वाटिका की योजना जैसे विषयों पर किसानों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि एक बीघा खेत की सुनियोजित आहार वाटिका से पूरे वर्ष परिवार के लिए अनाज, दाल, तेल, सब्जियां और फल उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान श्रेष्ठ किसान कार्यकर्ताओं तस्वीर देवी, कानाराम भुंवाल, राजेश कुआड़ और राजेश जाखड़ का सम्मान भी किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद