भरतपुर नगर निगम में निर्दलीयों का दबदबा, मेयर की कुर्सी का गणित 36 पार्षदों के हाथों में

 


भरतपुर, 14 सितंबर (हि.स.)। भरतपुर नगर निगम के चुनाव परिणामों ने मेयर पद के लिए भाजपा और कांग्रेस, दोनों के सामने नया सियासी गणित खड़ा कर दिया है। 65 वार्डों वाले निगम में निर्दलीय प्रत्याशियों ने 36 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत के सबसे करीब अपनी स्थिति बना ली है। भाजपा को 20 और कांग्रेस को महज सात सीटें मिली हैं। बसपा और आरएलपी ने एक-एक वार्ड में जीत दर्ज की है। इस तरह निगम की 55.4 प्रतिशत सीटें निर्दलीयों के खाते में गई हैं और बोर्ड गठन की चाबी अब बड़े पैमाने पर इसी खेमे के हाथ में है।

परिणामों की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्दलीयों ने भाजपा और कांग्रेस की संयुक्त सीटों से भी नौ अधिक वार्ड जीते हैं। भाजपा और कांग्रेस को मिलाकर 27 सीटें मिली हैं, जबकि अकेले निर्दलीयों का आंकड़ा 36 है। हालांकि निर्दलीयों की जीत अपने आप में बोर्ड गठन का बहुमत सुनिश्चित नहीं करती, लेकिन मेयर पद के चुनाव में उनका समर्थन निर्णायक होने की स्थिति में है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में लाना आवश्यक होगा।

भरतपुर में इस बार मतदान नौ सितंबर को हुआ था और निगम के 65 वार्डों की मतगणना सोमवार सुबह आठ बजे शुरू हुई। निगम क्षेत्र में 73.13 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भरतपुर में रोड शो किया था। भाजपा ने यहां 57 प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा था। परिणाम आने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने पार्षदों को एकजुट रखने के प्रयास में जुटे रहे और बड़ी संख्या में विजयी पार्षदों को बाड़ेबंदी में रखा गया।

सूत्रों के अनुसार भाजपा के विजयी पार्षदों सहित करीब 40 और कांग्रेस के करीब 20 पार्षद बाड़ेबंदी में हैं। ऐसे में अब दोनों दलों का ध्यान केवल अपने पार्षदों पर नहीं, बल्कि निर्दलीय पार्षदों पर भी केंद्रित हो गया है। खास बात यह है कि मेयर पद की दौड़ में माने जा रहे कई प्रमुख चेहरे पार्षद का चुनाव ही हार गए। इससे पहले से तय माने जा रहे समीकरण भी बदल गए हैं।

निर्दलीय खेमे में पूर्व मेयर शिव सिंह भौंट की पत्नी विचित्रा सिंह का नाम प्रमुखता से सामने आया है। उन्होंने वार्ड 17 से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की है। वार्ड में कांग्रेस ने प्रत्याशी नहीं उतारा था, जबकि भाजपा ने पूर्व पार्षद विमलेश कुमारी को मैदान में उतारा था। विचित्रा सिंह और शिव सिंह भौंट फिलहाल कांग्रेस खेमे से जुड़े बताए जा रहे हैं। ऐसे में यदि विचित्रा सिंह मेयर पद के लिए आगे आती हैं तो उनका राजनीतिक रुख महत्वपूर्ण हो सकता है। शिव सिंह भौंट स्वयं वार्ड 19 से चुनाव लड़े, लेकिन भाजपा के मनोज सिंह से हार गए।

भाजपा खेमे में वार्ड 58 से जीतीं निशा अग्रवाल का नाम भी मेयर पद की संभावित दावेदारों में चर्चा में है। उद्योगपति यश अग्रवाल की पत्नी निशा अग्रवाल ने भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की है। इसी तरह वार्ड 50 से भाजपा की लक्ष्मी संजय फौजदार ने जीत दर्ज की है। चुनाव से पहले उनके नाम को भी मेयर पद की दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा था। अब दोनों की जीत के बाद पार्टी के भीतर दावेदारी का आधार मजबूत हुआ है।

दूसरी ओर, वार्ड 25 में निर्दलीय आरती ने भाजपा की कल्पना कौशिक और कांग्रेस की सीमा शुक्ला को हराकर चुनाव जीता। कल्पना कौशिक को भाजपा प्रदेश प्रवक्ता की पत्नी के रूप में मेयर पद की संभावित दावेदारों में माना जा रहा था। वार्ड 59 में भी निर्दलीय आरती ने जीत दर्ज की, जहां भाजपा की कुसुमलता चुनाव मैदान में थीं। कुसुमलता को भी मेयर पद का संभावित दावेदार माना जा रहा था, लेकिन वे पार्षद का चुनाव नहीं जीत सकीं। इन हारों ने भाजपा के भीतर मेयर पद के लिए संभावित चेहरों का दायरा भी बदल दिया है।

वार्ड 18 का परिणाम भी मेयर पद की संभावनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। यहां कांग्रेस की मीनू डागुर ने पूर्व डिप्टी मेयर गिरीश चौधरी की पत्नी मीना कुमारी को हरा दिया। मीना कुमारी भी मेयर पद की दावेदार मानी जा रही थीं। इस तरह कई संभावित दावेदारों के पार्षद चुनाव हारने के बाद अब राजनीतिक दलों को जीते हुए चेहरों के बीच नए विकल्प तलाशने होंगे।

भरतपुर नगर निगम में पिछली बार कांग्रेस का बोर्ड रहा था। इस बार भाजपा के पास 20 सीटें हैं और निर्दलीय 36 सीटों के साथ सबसे बड़ा समूह बनकर उभरे हैं। ऐसे में भाजपा को अपना बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों का समर्थन हासिल करना होगा। वहीं कांग्रेस भी अपने सात पार्षदों और अपने प्रभाव वाले निर्दलीयों के सहारे मुकाबले में बने रहने की कोशिश करेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि भाजपा या कांग्रेस के पास कितनी सीटें हैं, बल्कि यह है कि 36 निर्दलीय पार्षदों में से कितने किस राजनीतिक खेमे के साथ खड़े होते हैं। यही संख्या भरतपुर नगर निगम की अगली मेयर की कुर्सी तय करने में निर्णायक साबित होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर