बंगाली समाज ने निभाई सिंदूर खेला की रस्म

 


जोधपुर, 20 अक्टूबर (हि.स.)। शारदीय नवरात्रा के उपलक्ष्य में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बंगाली समाज की ओर से आयोजित छह दिवसीय दुर्गा पूजा महोत्सव के तहत समाज की महिलाओं ने सिंदूर खेला की रस्म निभाई।

सरदारपुरा प्रथम डी रोड पर नेहरू पार्क के पीछे स्थित दुर्गाबाड़ी परिसर में आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव में आज सुबह दशमी पूजन आरंभ हुआ। इसके बाद दर्पण विसर्जन एवं सिंदूर खेला की रस्म का आयोजन हुआ। आयोजकों ने बताया कि बंगाली समाज की ओर से माता की पूजा में सिंदूर खेला की रस्म निभाई गई। यहां समाज की महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगाकर खुशियां मनाई।

सिंदूर खेला की रस्म के समय विवाहित महिलाओं ने अपने पति के लंबी उम्र की कामना की। कुंवारी लड़कियां भी मनपसंद वर के लिए इस रस्म में शामिल हुईं। महिलाओं ने बंगाल का पारंपरिक नृत्य धुनुची भी किया। बच्चों से लेकर बड़े भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। मान्यता है कि नवरात्र में मां दुर्गा अपने मायके आती है इसलिए जगह-जगह पर उनके पंडाल सजाते हैं। यहां दशमी पर सिंदूर की होली खेल कर मां दुर्गा का पूजन किया जाता है।

समाज के प्रवक्ता सुमन विश्वास ने बताया कि नवमी पूजा कोलकाता से आए पंडित शिबू मिश्र द्वारा संपन्न करवाई गई। पूजा के बाद पुष्पांजलि, कुमारी कन्या पूजन, बलिदान की परंपरा और हवन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हुए। इसके बाद मां दुर्गा को भोग अर्पित किया गया। नौ वर्षीय रूपा विश्वास को कुमारी कन्या के रूप में शृंगारित कर विधिवत पूजन किया गया। समाज के लोगों ने हवन के माध्यम से विश्वकल्याण और शांति की कामना की। शाम को मां दुर्गा की आरती की गई। मंदिर परिसर में मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, भगवान कार्तिकेय और मां सरस्वती की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं, जिनकी विधिवत पूजा-अर्चना की जा रही है।

बंगाली समाज में मां दुर्गा को बेटी के रूप में मानने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा अपने परिवार के साथ मायके आती हैं। इसी भाव के साथ समाज के लोग दुर्गा उत्सव को पारिवारिक मिलन और भक्ति के पर्व के रूप में मनाते हैं।

समाज की ओर से 21 अक्टूबर को महिलाओं द्वारा सिंदूर खेला की रस्म निभाई जाएगी। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा को जुलूस के रूप में जलाशय तक ले जाकर विसर्जित किया जाएगा। समाज के लोग एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर पर्व की शुभकामनाएं देंगे। पंडित द्वारा शांति जल वितरण के साथ दुर्गा पूजा महोत्सव का समापन होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश