रविंद्र भाटी के आत्मदाह प्रयास पर बोले अशोक गहलोत, कहा- भाजपा शासन में लोकतंत्र पर कलंक

 


जयपुर, 20 मई (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बाड़मेर में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी द्वारा आत्मदाह के प्रयास की घटना को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। गहलोत ने कहा कि एक विधायक का मजबूर होकर खुद पर पेट्रोल उड़ेलना भाजपा शासन में लोकतंत्र पर कलंक है और इससे आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि रविंद्र सिंह भाटी पिछले 15 दिनों से माइनिंग मजदूरों के साथ धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया। इसी उदासीनता के कारण विधायक को मजदूरों के साथ कलेक्ट्रेट कूच करना पड़ा और वहां खुद पर पेट्रोल उड़ेलने जैसे कठोर कदम के लिए मजबूर होना पड़ा।

गहलोत ने कहा कि यदि एक जनप्रतिनिधि को अपनी मांगों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए ऐसा कदम उठाना पड़ रहा है, तो आम आदमी की स्थिति समझी जा सकती है। उन्होंने राज्य सरकार से मजदूरों की मांगों पर तत्काल सकारात्मक समाधान निकालने की मांग की।

वहीं पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने भी घटना को लेकर सरकार पर हमला बोला। हालांकि उन्होंने कहा कि किसी विधायक या जनप्रतिनिधि को इस तरह की अत्यधिक भावुकता से बचना चाहिए और विरोध का तरीका हमेशा संवैधानिक होना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से आत्मदाह जैसे कदम को कानून और सुरक्षा की दृष्टि से गलत और अस्वीकार्य बताया।

दरअसल, बाड़मेर जिले के गिरल गांव में स्थानीय माइनिंग मजदूरों, ड्राइवरों और ग्रामीणों की मांगों को लेकर पिछले 39 दिनों से आंदोलन चल रहा है। आंदोलनकारी स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने और 8 घंटे की ड्यूटी लागू करने की मांग कर रहे हैं। विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी मजदूरों के समर्थन में धरने पर बैठे हैं।

मंगलवार को गिरल गांव में आयोजित मजदूर रैली के बाद विधायक भाटी समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां अधिकारियों के साथ वार्ता के दौरान उन्होंने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस और लोगों ने उन्हें रोक लिया।

बाद में करीब पांच घंटे तक चली वार्ता भी बेनतीजा रही, जिसके बाद भाटी वापस धरना स्थल पर लौट गए।

गौरतलब है कि गिरल लिग्नाइट माइंस का संचालन राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड द्वारा किया जाता है, जहां स्थानीय लोगों के रोजगार को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित